जल-जंगल-जमीन की जंग, हजारों विस्थापितों का कलेक्ट्रेट घेराव, गेट पर ताला, रातभर धरने की चेतावनी
मध्यप्रदेश के सागर संभाग के Panna में आज जल-जंगल-जमीन की लड़ाई ने बड़ा रूप ले लिया। केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से विस्थापित हजारों आदिवासी और किसान सड़कों पर उतर आए और कलेक्ट्रेट का घेराव कर दिया। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने न्याय सत्याग्रह के जरिए प्रशासन के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। यह विशाल रैली Jai Kisan Sangathan के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता Amit Bhatnagar के नेतृत्व में निकाली गई। सतना नाके से शुरू हुई यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां हजारों की भीड़ ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन Land Acquisition Act 2013 के नियमों की अनदेखी कर रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि कानून के तहत जहां न्यूनतम 7 लाख 36 हजार रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए, वहां विस्थापितों को केवल 5 लाख रुपये दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कई किसानों की सिंचित जमीन को असिंचित बताकर मुआवजा आधा कर दिया गया है। स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश करने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने हालात बिगड़ते देख मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया। इसके बाद भीड़ और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि बिना पूर्ण पुनर्वास के उनकी खड़ी फसलों पर जेसीबी चला दी गई और उन्हें उजाड़ दिया गया। उनकी मांग है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ग्राम सभाओं के साथ दोबारा शुरू की जाए, महिलाओं के लिए अलग पुनर्वास पैकेज दिया जाए और विस्थापितों के लिए बुनियादी सुविधाओं वाले नए गांव बसाए जाएं। शाम करीब छह बजे पांच लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर Usha Parmar से मिला, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। इसके बाद आंदोलनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में ही डेरा डाल दिया। धरने में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इन विस्थापितों को न्याय मिलेगा या उन्हें आज की रात भी भूखे-प्यासे धरने पर ही गुजारनी पड़ेगी। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का कहना है कि जब तक न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।