जनता की अदालत में तहसीलदार घिरे! सपा नेता मनोज यादव और अधिकारी में तीखी बहस
बुंदेलखंड की धरती से एक बार फिर प्रशासन और राजनीति के बीच तीखी टकराहट की तस्वीर सामने आई है। एमपी के सागर संभाग के पन्ना में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और तहसीलदार के बीच हुई गर्मागरम बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। आरोप है कि प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ मारपीट हुई, जिसके बाद मामला और गरमा गया। मध्यप्रदेश के पन्ना कलेक्टरेट के बाहर पिछले दो दिनों से केन-बेतवा लिंक परियोजना, माझगे माध्यम परियोजना और रूंझ माध्यम सिंचाई परियोजना से प्रभावित आदिवासी और किसान परिवार आंदोलन कर रहे थे। अपनी जमीन और पुनर्वास की मांग को लेकर सैकड़ों किसान धरने पर बैठे थे।
इसी दौरान समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव वहां पहुंचे। आंदोलन कर रहे किसानों की भीड़ देखकर उन्होंने मौके पर मौजूद पन्ना के तहसीलदार अखलेश प्रजापति को बुलाया और फिर शुरू हुई तीखी बहस। वायरल वीडियो में नेताजी सीधे शब्दों में कहते दिखाई दे रहे हैं—“तहसीलदार साहब, ये लोग आपकी सेवा के लिए यहाँ नहीं बैठे हैं… आप इनके लिए हैं। अगर आपने अपना काम ठीक से किया होता, तो किसान अपनी फसल की कटाई छोड़कर यहाँ धरने पर नहीं बैठते।” बताया जा रहा है कि बहस उस समय और तीखी हो गई जब एक किसान के साथ कथित मारपीट की बात सामने आई। इस पर मनोज यादव ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा—“अगर किसी भी किसान के साथ बदतमीजी हुई है, तो सबसे पहले आपके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।”
नेताजी ने कलेक्टर की गैरमौजूदगी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब हजारों किसान कलेक्टरेट के बाहर बैठे हैं, तो प्रशासन का शीर्ष अधिकारी उनसे मिलने क्यों नहीं आया। बहस के आखिर में नेताजी ने लोकतंत्र का हवाला देते हुए कहा—“सुधर जाइए तहसीलदार साहब… क्योंकि यही जनता सरकार बनाती है और जरूरत पड़ने पर दो मिनट में बदल भी देती है। किसान अन्नदाता हैं, इनके सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि जब तहसीलदार से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कैमरे के सामने आने से इनकार कर दिया, लेकिन फोन पर इतना जरूर कहा कि उन्होंने भी नेता जी के तेवर का जवाब उसी अंदाज में दिया। अब देखना होगा कि यह सियासी और प्रशासनिक टकराव आगे क्या मोड़ लेता है। फिलहाल पन्ना की यह बहस पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।