नौकरी छोड़ शुरू की मशरूम की खेती,अब सालाना लाखों का टर्नओवर, मशरूम वाली दीदी
कहते हैं की जहां चाह है वहां राह है। जी हां इसे साबित कर दिखाया है एक ऐसी युवती ने जिसने अपनी संविदा की नौकरी छोड़ दी और मशरूम की खेती शुरू की। जिससे सब उनका सालाना टर्न ओवर लाखों रूपये में है। अब उन्हें लोग मशरूम वाली दीदी के नाम से पुकारते हैं। ये कहानी है एमपी के बालाघाट जिले के एक छोटे से गांव धनसुआ की रहने वाली अनुराधा भौतेकर की, जिनकी पहचान अब सफल महिला किसान के रूप में होती है।
अनुराधा ने संविदा की नौकरी छोड़ मशरूम की खेती शुरू की। इससे उन्हें अच्छी खासी इनकम हो रही है। नौकरी छोड़ने के बाद 8 साल तक वे घर पर हाउसवाइफ बन कर रही। फिर उन्हें कही से पता चला कि कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव किरनापुर में मशरूम का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। तो ट्रेनिंग लेकर मशरूम की खेती शुरू कर दी। वह पिछले 2 सालों से मशरूम की खेती कर रही हैं। और बटन मशरूम की खेती करने वाली जिले की पहली महिला है।
अनुराधा ने फूड एंड न्यूट्रीशन विषय में एमएससी की डिग्री हासिल की थी। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने संविदा की नौकरी भी की, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें वह नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद 8 साल वह सिर्फ एक हाउसवाइफ बनकर रह गई। दो बेटियों की परवरिश और घर की जिम्मेदारियों के बीच उनकी अपनी पहचान कहीं खो गई थी। लेकिन तभी अनुराधा को कृषि विज्ञान केंद्र बड़गांव (किरनापुर) में मशरूम उत्पादन के प्रशिक्षण के बारे में पता चला। और खुद को पूरे तरह इस काम में झोंक दिया। बीते दो सालों से वह मशरूम की खेती कर रही हैं।
अनुराधा मशरूम बेचकर सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा की आय अर्जित कर रही हैं। अनुराधा कहती हैं की पहले उन्हें सिर्फ एक हाउसवाइफ के तौर पर देखा जाता था। लेकिन आज एक वर्किंग वुमन हैं। मशरूम की खेती ने एक नई पहचान दी है। धनसुआ जैसे छोटे से गांव से निकलकर मशरूम वाली दीदी बनने तक का उनका यह सफर जिले की उन हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो अपनी पहचान की तलाश में हैं।