उपसरपंच की दबंगई, दृष्टिहीन महिला का 2 साल से नहीं बनने दे रहे घर,प्रशासन से लगा रही गुहार !
सरकार महिलाओं की सुरक्षा और उनके हक़ को लेकर कई तरह की बातें करती है। लेकिन कई बार यह चीजें खोखली साबित होती हैं। इसी तरह एक दिव्यांग महिला जो बीते दो सालों से अपने ही घर का निर्माण करने के लिए संघर्ष कर रही है। उसका आरोप है की गांव के उपसरपंच की कथित दबंगई के कारण वह अपने मकान का निर्माण नहीं कर पा रही है। मामला एमपी के धार जिले के सलकनपुर गांव का है जहां एक दृष्टिहीन और बेसहारा महिला परेशान है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही है।
सलकनपुर गांव निवासी अनिता वर्मा, जो पूरी तरह दृष्टिहीन है। वह अपने पुश्तैनी जर्जर मकान में अकेले रहकर किसी तरह से जीवन यापन कर रही हैं। वह मात्र तीन साल की थीं। तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद उनकी मां ने पालन-पोषण किया। लेकिन करीब छह साल पहले मां भी गुजर गयीं। जिससे अनिता पूरी तरह अकेली हो गईं। यह दृष्टिहीन हैं जिस वजह से उसका जीवन यापन पहले से ही कठिन है। सरकारी योजनाओं से मिलने वाली सहायता और राशन के सहारे गुजर-बसर हो रहा है। अनिता के मुताबिक उनका मकान बेहद जर्जर हो चुका है। जो कभी भी गिर सकता है।
इसलिए वह उसकी मरम्मत कर उसे रहने योग्य बनाना चाहती हैं। उनका आरोप है की गांव के उपसरपंच कमल मुकाती, जो खुद को भाजपा से जुड़ा नेता बताते हैं। पिछले दो सालों से उन्हें घर बनाने से रोक रहे हैं। जब भी वह निर्माण कार्य शुरू करने मजदूर बुलाती हैं। तो उन्हें धमकाकर भगा दिया जाता है। महिला का कहना है कि जमीन का सरकारी पट्टा उनके नाम पर है और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उन्हें 25 हजार रुपये की पहली किस्त भी मिल चुकी है। उन्होंने घर निर्माण के लिए गड्ढा खुदवाकर दीवार खड़ी करवाई थी। लेकिन आरोप है कि उसे भी तुड़वा दिया गया।
पीड़िता का कहना है की वह पिछले दो सालों से तहसीलदार, एसडीएम और पुलिस थाने में शिकायत कर चुकी हैं जनसुनवाई में भी आवेदन दिए। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। महिला की स्थिति को देखते हुए इंदौर की समाजसेवी बबीता चौहान उन्हें लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की। अब देखने वाली बात होती है की आखिर पीड़िता को कब तक न्याय मिल पाता है।------