दशकों पुरानी विरासत को मिला नया जीवन फिर गूंजी नेपा मिल की मशीनें | SAGAR TV NEWS |
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। दशकों पुरानी ऐतिहासिक नेपा मिल में एक बार फिर मशीनों की आवाज गूंज उठी है। लंबे समय से बंद पड़ी इस कागज मिल का ट्रायल ऑपरेशन शुरू हो गया है, जिससे क्षेत्र में खुशी की लहर है। मामला है बुरहानपुर की ऐतिहासिक नेपा लिमिटेड का, जिसे एशिया की सबसे पुरानी और बड़ी शासकीय कागज मिलों में गिना जाता है। ट्रायल ऑपरेशन के तहत बॉयलर लाइट-अप के साथ मिल के संचालन की प्रक्रिया का सफल परीक्षण किया गया।
चिमनी से उठता धुआं और पेपर मशीनों की शुरुआत इस बात का संकेत है कि मिल एक बार फिर पूरी तरह से पटरी पर लौटने की ओर बढ़ रही है। यह मिल कभी देश को अखबारी कागज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाती थी और करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत करती थी। इस दौरान केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की आर्थिक सलाहकार डॉ. रेणुका मिश्रा और स्वतंत्र निदेशक मिलिंद कनाडे ने मिल का दौरा कर उत्पादन प्रक्रिया का निरीक्षण किया। उनके साथ अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नरेश सिंह सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
मिल को फिर से चालू करने के लिए क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री एच डी कुमारस्वामी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कार्यशील पूंजी पैकेज की मांग की थी। करीब 75 साल पुराने इतिहास वाली इस मिल का 2022 में नवीनीकरण हुआ था। यह एशिया की पहली अखबारी कागज मिल मानी जाती है और 1995 में गुलाबी न्यूजप्रिंट बनाने का श्रेय भी इसी को जाता है। नेपा मिल का दोबारा शुरू होना न सिर्फ औद्योगिक पुनर्जीवन की कहानी है, बल्कि इससे रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पूरे आदिवासी क्षेत्र को नई उम्मीद भी मिली है।