सागर- खामोश बीमारी से बचें! IMA सागर की चेतावनी 40 के बाद आंखों की जांच जरूरी | SAGAR TV NEWS |
सागर में विश्व ग्लूकोमा वीक के मौके पर एक अहम जागरूकता संदेश सामने आया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन यानी IMA सागर शाखा ने लोगों को चेताया है कि 40 साल की उम्र के बाद आंखों की नियमित जांच बेहद जरूरी है, क्योंकि ग्लूकोमा एक ऐसी खामोश बीमारी है जो धीरे-धीरे रोशनी छीन सकती है। इसी कड़ी में IMA सागर और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में इंद्रा नेत्र अस्पताल में एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों, आशा कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। शिविर का मुख्य उद्देश्य था—ग्लूकोमा जैसी गंभीर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना, ताकि समय रहते इसकी पहचान हो सके और अंधेपन जैसी स्थिति से बचा जा सके।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अदिति दूबे ने बताया कि ग्लूकोमा एक “साइलेंट किलर” की तरह काम करता है। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती चरण में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। कई बार मरीज को तब पता चलता है, जब उसकी आंखों की रोशनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है। वहीं मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. जितेंद्र सराफ ने बताया कि नियमित नेत्र जांच—जैसे ऑप्टिक नर्व की जांच और आंखों के अंदर के दबाव (इंट्राओक्युलर प्रेशर) का मापन—इस बीमारी का समय रहते पता लगाने में मदद करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक बार चली गई रोशनी वापस नहीं लाई जा सकती, लेकिन सही समय पर इलाज से आगे नुकसान को जरूर रोका जा सकता है।
IMA सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद के अनुसार, भारत में करीब 1.2 करोड़ लोग ग्लूकोमा से प्रभावित हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है। सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 90% मामलों का समय पर पता ही नहीं चल पाता। ऐसे में डॉक्टरों की साफ सलाह है—अगर आपकी उम्र 40 साल से ज्यादा है, तो हर साल आंखों की जांच जरूर कराएं। क्योंकि समय पर जांच ही आपकी आंखों की रोशनी बचा सकती है।