विक्रमोत्सव 2026 में गूंजा कोटि सूर्य उपासना का संदेश ! नाट्य मंचन से जीवंत हुआ सम्राट विक्रमादित्य का गौरवशाली इतिहास
एमपी के टीकमगढ़ में हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत 2083 के शुभारंभ पर भव्य विक्रमोत्सव 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें ‘कोटि सूर्य उपासना’ कार्यक्रम ने श्रद्धा और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। मध्य प्रदेश शासन के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश संस्कृत विभाग, मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय भोपाल और जिला प्रशासन के संयुक्त समन्वय से स्थानीय उत्सव भवन में किया गया। गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत संत स्वामी चौकी वाले बाबा विजय राघव सरकार, सांसद प्रतिनिधि विवेक चतुर्वेदी, अनुराग वर्मा और अपर कलेक्टर शिवप्रसाद मंडराह द्वारा मां सरस्वती के पूजन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद ब्रह्मध्वज की स्थापना की गई, जो भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक है। इस दौरान कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा नाट्य मंचन, जिसमें कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य के जीवन की प्रेरणादायक गाथा को जीवंत कर दिया। पाहुना लोक जन समिति टीकमगढ़ के नाट्य दल ने निर्देशक संदीप श्रीवास्तव के नेतृत्व में शानदार प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों—न्याय, पराक्रम और जनसेवा—को आज के जीवन में अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी अतिथि और अधिकारी नजरबाग परिसर पहुंचे, जहां ध्वज पूजन कर मंदिर के ऊपर ब्रह्मध्वज स्थापित किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे। कुल मिलाकर, विक्रमोत्सव 2026 का यह आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव को नई ऊर्जा के साथ जन-जन तक पहुंचाने का सफल प्रयास भी साबित हुआ।