कफन में जिंदा बच्ची ! मृत घोषित कर दिया, अस्पताल की बड़ी लापरवाही उजागर
एमपी के भोपाल से एक बेहद चौंकाने वाला और सिस्टम पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। यहां डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने एक जिंदा नवजात को मृत घोषित कर दिया… इतना ही नहीं, उसका डेथ सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया। लेकिन जब बच्ची कफन में लिपटी हुई रोने लगी, तो पूरा सच सामने आ गया। मामला हमीदिया अस्पताल परिसर स्थित कमला नेहरू चिकित्सालय का है। जानकारी के अनुसार, 16 मार्च को रायसेन जिले के बाड़ी बरेली निवासी परवेज खान अपनी पत्नी फिज़ा को लेकर भोपाल पहुंचे थे। महिला छह महीने की गर्भवती थी और उसे प्रसव पीड़ा हो रही थी।
शाम करीब 7:30 बजे सुल्तानिया जनाना अस्पताल में प्रसव हुआ। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने नवजात बच्ची को मृत घोषित कर दिया। परिजनों को गहरा सदमा लगा, लेकिन यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। करीब एक घंटे बाद बच्ची का मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया। परिजन बच्ची को कफन में लपेटकर दफनाने की तैयारी कर रहे थे। लगभग 3 से 4 घंटे बाद, जब कफन खोला गया… तो बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। यह देख परिजन दंग रह गए। जांच करने पर पता चला कि बच्ची जिंदा थी।
इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में नवजात को कमला नेहरू अस्पताल के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया। हालांकि, पूरी रात चले इलाज के बावजूद बच्ची को बचाया नहीं जा सका और गुरुवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने ड्यूटी डॉक्टर पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बच्ची को बिना सही जांच के मृत घोषित कर दिया गया। इतना ही नहीं, वीडियो बनाने पर मोबाइल छीनने और मामले को दबाने का भी आरोप लगाया गया है।
मृत्यु प्रमाण पत्र में डॉ. प्रियंका चौधरी का नाम सामने आया है, जिससे अब जिम्मेदारी को लेकर सवाल और भी गहरे हो गए हैं। फिलहाल यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—क्या एक जिंदा बच्ची को मृत घोषित करना सिर्फ लापरवाही है या सिस्टम की बड़ी खामी? अब देखना होगा कि इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।