नूतन वर्ष पर बाबा महाकाल का नीम मिश्रित जल से अभिषेक,शिखर पर लहराया केसरिया ब्रह्मध्वज
चैत्र नवरात्रि के साथ ही हिंदू नव वर्ष की शुरुआत हो गयी है। इसको लेकर एमपी के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्द बाबा महाकाल मंदिर में हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा का पर्व उल्लास और प्राचीन परंपराओं के साथ मनाया गया। नूतन वर्ष के मंगल अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर में विशेष अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। जिसमें भगवान महाकालेश्वर का नीम मिश्रित जल से अभिषेक किया गया और मंदिर के गगनचुंबी शिखर पर सूर्य चिन्ह अंकित नया केसरिया ब्रह्मध्वज लहराया गया। नव संवत्सर के स्वागत में सुबह से ही पूरा मंदिर परिसर जय महाकाल के उद्घोष से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने नए साल के पहले दिन बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया और सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।
अल सुबह होने वाली आरती से पहले परंपरा का निर्वहन करते हुए भगवान महाकालेश्वर का नीम मिश्रित जल से अभिषेक हुआ। चैत्र महीने की शुरुआत में आरोग्य की कामना के साथ बाबा को नीम जल अर्पित करने की यह प्राचीन परंपरा आज भी जीवंत है। मान्यता है कि संवत्सर के पहले दिन नीम के औषधीय गुणों के साथ पूजन करने से साल भर स्वास्थ्य और खुशहाली बनी रहती है। भस्म आरती के समय से ही मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ता रहा। जिन्होंने नए साल की शुरुआत बाबा के आशीर्वाद के साथ की। इसके अलावा महाकाल मंदिर के शिखर की आभा भी पूरी तरह बदली हुई नजर आई। सम्राट विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा उपलब्ध कराया गया सूर्य चिन्ह वाला केसरिया ब्रह्मध्वज श्रद्धा के साथ मंदिर प्रबंध समिति को सौंपा गया। ध्वजारोहण की प्रक्रिया से पूर्व मंदिर परिसर स्थित पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा में विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। यहां महंत विनीत गिरी महाराज के सानिध्य में केसरिया ध्वज का विधिवत पूजन और मंत्रोच्चार किया गया। जिसके बाद इसे मंदिर के मुख्य शिखर पर स्थापित किया गया।