15 साल बाद कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, नहीं टूटेंगी 54 दुकानें,फैसले के बाद जोरदार जश्न
हाई कोर्ट ने 54 दुकानों को हटाए जाने का आदेश दिया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। जहां से अब नगर पालिका की बड़ी जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इस आदेश को पलट दिया है। यानी अब 54 दुकानों को नहीं तोड़ा जायेगा। चैत्र नवरात्रि ईद के पहले लोगों को बड़ी खुशखबरी मिली। जिस पर नगर पालिका ने जश्न मनाया। मामला उज्जैन के खाचरौद का है। जहां उज्जैन दरवाजा की 54 दुकानें हटाने के हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने पलटा है। यह फैसला नगर पालिका के हित में सुनाया गया।
नगर पालिका अध्यक्ष गोविन्द भरावा के मुताबिक एक जनहित याचिका द्वारा नगर पालिका के विरुद्ध उक्त 54 दुकानों को तोड़ने केस दायर किया गया था। मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने नगर पालिका के खिलाफ फैसला सुनाते हुए इन दुकानों को तोड़ने का आदेश पारित किया था। इस फैसले के विरुद्ध नगर पालिका परिषद और दुकानदारों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने नगर पालिका और दुकानदारों के हित मे फैसला सुनाते हुए आदेश पारित किया की दुकानें यथावत स्थिति में रहेगी। साथ ही नगर पालिका की सभी कार्यवाही को भी सुप्रीम कोर्ट ने विधि सम्मत माना है।
बताया गया की सुप्रीम कोर्ट में साल 2011 से यह मामला विचाराधीन था। साल 2022 में कांग्रेस की परिषद बनने के बाद तत्कालीन विधायक दिलीप सिंह गुर्जर ने नगर पालिका अध्यक्ष गोविन्द भरावा को इस मामले को गम्भीरता से लेकर जल्द से जल्द निराकरण कराने कहा था। करीब 15 साल बाद नगर पालिका और व्यापारियों के हित में फैसला आया है। जिसके बाद व्यापारियों ने राहत की सांस ली। और जश्न भी मनाया गया। पूर्व विधायक दिलीपसिंह गुर्जर ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ये जनहित में दिया गया ऐतिहासिक फैसला है जिसमें 54 परिवारों की जीवन भर की कमाई और रोजी रोटी, रोजगार बचा है।