सिंहस्थ महाकुम्भ से पहले साधु-संतों में दो फाड़,एक के पास 8 तो दूसरे के पास 5 अखाड़ों का समर्थन
आगामी साल 2028 में सिंहस्थ महाकुम्भ का आयोजन किया जाना है। जिसकी बड़े स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। लेकिन दूसरी तरफ साधु-संत दो फाड़ नज़र आ रहे हैं। उज्जैन में साल 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। जिसको लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। लेकिन साधु-संतों में सब कुछ ठीक नज़र नहीं आ रहा है। दरअसल देश के 13 अखाड़ों में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महा निर्वाणी अखाड़े के रवींद्र पुरी महाराज ही होंगे। यहां बता दे की बाकी 5 अखाड़ों का समर्थन निरंजनी अखाड़े के रवींद्र पुरी महाराज को है इसलिए वह भी अपने आप को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताते हैं। दरअसल उज्जैन के मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। संतो के इस समागम में 13 में से 8 अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए । खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के संत रवींद्र पुरी महाराज का स्वागत सम्मान किया गया। आयोजन के बाद संत रवींद्र पुरी महाराज ने मीडिया से चर्चा की। इस दौरान सवालों के जवाब देते हुए कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव है। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से 8 अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। जिसमें सन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल है। वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। सिंहस्थ के आयोजन को लेकर कहा कि अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा हुई है। लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे। विकास कार्यों में सरकार को अखाड़ा परिषद का समर्थन है।-