Sagar -भाग्योदय से पैसा नहीं मिलने के बाद आर पार के मूड में डॉक्टर, आचार्य श्री को लिखी चिट्ठी
सागर की भाग्योदय अस्पताल में सेवा देने के बाद ट्रस्ट से पैसे नहीं मिलने के बाद डॉक्टर सर्वेश जैन आर पार के मूड में आ गए हैं, प्रदेश अध्यक्ष की चिट्ठी आने के बाद भी पारिश्रमिक नहीं मिला तो अब उन्होंने समाज के सब कुछ आचार्य श्री समय सागर जी के लिए चिट्ठी लिखी है
खुद को नास्तिक बताते हुए लिखा की जैन संतों के प्रति मेरी अगाध श्रद्धा यदि अभी तक कायम है तो उसके मूल में उनका लोभ रहित जीवन है. सच्चा दिगम्बर जैन मुनि किसी सांसारिक लाभ के चलते पाप इसलिए नहीं कर सकता है कि जब ज़ेब ही नहीं है तो संग्रह करके सम्पत्ति रखेंगे कहां ?
चिट्ठी के माध्यम से डॉक्टर ने शांति से उनका सुझाव ग्रहण करने का निवेदन किया और कहा कि जैन समाज में भी पिछले कुछ दिनों में एक जेहादी तबका बन गया है जो भगवान महावीर के अहिंसा धर्म का झण्डा उठाकर, अपने से असहमत रहने वालों को पीट देता है और कोर्ट कचहरी अखबारबाजी में पूरी समाज को शर्मिंदा होना पड़ता है। इन जेहादी तंजीमों से बस इतना निवेदन है कि लड़ने झगड़ने का यदि इतना शौक है तो लड़े किंतु महावीर के अहिंसा धर्म को बदनाम न करे ।गुरुजी, खुले मंच से जब दान की बोलियां लगती है तो बड़ा लज्जासपद लगता है क्योंकिप्रवचन में धन और परिग्रह को त्याज्य बताया जाता है और प्रवचन के पहले, उसी मंच से धन और धनवान को महिमामंडित किया जाता है ।
दूसरा शिकवा यह था कि मुनियों की कठिन तपस्या से आम लोगों में करुणा भाव उत्पन्न होता है और उसके वशीभूत होकर वो दान करते है. हर मुनि उस पैसे से ट्रस्ट बनवा कर अन्यत्र विहार कर जाता है और फिर ट्रस्ट में सारी गड़बड़ें होती है उसके लिए कोई भी जवाबदेह नहीं होता । सरकार भी धार्मिक लफड़ों में पड़ने से बचती है ।अतः पूज्य मुनिवर से निवेदन है कि नीलामी जैसा दान का एकत्रीकरण को बंद और जैन ट्रस्टों में जवाबदेही की उचित व्यवस्था करे ।