नल-जल योजना को लगाया पलीता,लोग अब भी प्यासे, लाखों-करोड़ों के काम को किया जबरन हैंडओवर !
लोगों को आज तक नल से एक बूँद भी पानी नसीब नहीं हुआ। लेकिन योजना को पूरा बता दिया गया। लोग पानी को तरस रहे हैं लेकिन पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। जबकि काम को पूरा बताकर बकायदा इसे हैंड ओवर भी कर दिया गया। ये न सिर्फ सरकारी पैसे का दुरूपयोग है बल्कि सरकारी योजना को पलीता लगाने वाली बात है। जी हां केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले में ये आलम है। जहां लोग पानी को तरस रहे हैं। सीहोर जिले की जनपद पंचायत आष्टा क्षेत्र में नल-जल योजना एक बार फिर विवादों में है। जहां अधूरे काम को जबरन हैंड ओवर कर दिया गया। आरोप है की सरपंचों को गुमराह करके उनके हस्ताक्षर कराये गए। मिट्ठूपुरा (किल्लौद) और मेतवाड़ा में बिना ट्रायल योजना सौंप दी गई।
पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि अधूरे कार्यों को कागजों में पूरा दिखाकर पंचायतों को योजना का हैंडओवर कर दिया गया और जनप्रतिनिधियों से गुमराह कर साइन करवा लिए गए। मिट्ठूपुरा गांव के सरपंच दिलीप सिंह ने आरोप लगाया की उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि जिन दस्तावेजों पर वे हस्ताक्षर कर रहे हैं। वे नल-जल योजना के हैंडओवर से संबंधित हैं। उनका कहना है कि न तो गांव में नियमित जलापूर्ति शुरू हुई है और न ही अनिवार्य 3 महीने का ट्रायल रन लिया गया। इसके बावजूद विभाग ने योजना को पूर्ण घोषित कर पंचायत के जिम्मे सौंप दिया। सरपंच के मुताबिक गांव में कई स्थानों पर पाइपलाइन अधूरी है। घर-घर चैंबर निर्माण नहीं हुआ है। पानी की टंकी का कार्य भी पूर्ण नहीं हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर किस आधार पर योजना को पूरा मान लिया गया। ग्रामीणों का कहना है की कई घरों तक आज तक चैंबर नहीं पहुंचे। पाइपलाइन अधूरी पड़ी है। पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है की अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई ग्राम पंचायत मेतवाड़ा की सरपंच किरण बाई का आरोप है की उन्हें बिना स्पष्ट जानकारी दिए हैंडओवर के साइन करवा लिए गए। जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरा है। दो अलग-अलग पंचायतों में एक ही तरह की समस्याएं हैं। जब एसडीओ जिज्ञासा दीक्षित से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि काम पूरी तरह पूरे है। योजना का हैंडओवर नियमानुसार कर दिया गया है। नियमानुसार किसी भी नल-जल योजना को पंचायत को सौंपने से पहले उसका कम से कम 3 महीने का ट्रायल रन अनिवार्य होता है। ऐसी जानकारी है की मिट्ठूपुरा के सरपंच ने इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला पंचायत सीहोर और जनपद पंचायत आष्टा में की है।
जब इन दोनों मामलों में जनपद पंचायत सीईओ से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि पीएचई विभाग को लेटर लिखा है की हमें पूरी जानकारी दीजिए कि आपने किस आधार पर ग्राम पंचायत को नल जल योजना हैंडओवर की है इसकी जानकारी हमने पीएचई विभाग से मांगी है।------