स्पॉट फाइन के नाम पर किया खेला,जुर्माना वसूला पैसा जमा नहीं, करोड़ों का हेरफेर और रसीद गायब !
स्वच्छता के नाम पर स्पॉट फाइन का खेल उजागर होने के मामला सामने आया है। जहां नगर निगम में करोड़ों रूपये का घोटाला सामने आया है। मतलब लोगों से जुर्माना तो वूसला गया। लेकिन अब 20 से ज्यादा रसीदें गायब हो गयी हैं। जिससे अब कई सवाल गहरा गए हैं। मामला एमपी के उज्जैन जिले का है। स्वच्छता के नाम पर आम जनता और संस्थानों से वसूले जाने वाले स्पॉट फाइन की राशि में बड़े पैमाने पर हेरफेर की आशंका जताई जा रही है। ऑडिट रिपोर्ट में हुए सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक, निगम की 20 से ज्यादा रसीद बुक रिकॉर्ड से गायब हो गई हैं। ऐसा अनुमान जताया जा रहा है की इन गायब रसीद बुकों के जरिए वसूले गए करोड़ों रुपये सरकारी खजाने में पहुंचने के बजाय भ्रष्ट मुलाजिमों की जेबों में चले गए हैं।
इस घोटाले की जड़ें स्वच्छ भारत मिशन के तहत की जाने वाली उन कार्रवाइयों में छिपी हैं। जहाँ होटलों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाता था। आरोप है कि मौके पर रसीदें तो काटी गईं और राशि भी वसूली गई, लेकिन उस पैसे को निगम के खाते में जमा ही नहीं किया गया। इतना ही नहीं, ऑडिट में यह भी निकलकर सामने आया है कि कई रसूखदार कर्मचारियों ने एडवांस के नाम पर मोटी रकम ली, जिसे लंबे समय बाद भी वापस नहीं लौटाया गया। इस वित्तीय अनियमितता ने निगम की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑडिट फाइंडिंग रिपोर्ट को एमआईसी (महापौर परिषद) के समक्ष रखा गया है, जिसके बाद निगम प्रशासन में हड़कंप की स्थिति है। पार्षदों और जानकारों का मानना है कि यदि गहराई से जांच हुई, तो गबन का यह आंकड़ा उम्मीद से कहीं ज्यादा बड़ा निकल सकता है। फिलहाल, निगम अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि यदि गायब रसीद बुकों और बकाया राशि का संतोषजनक हिसाब नहीं मिला, तो दोषियों के खिलाफ न केवल विभागीय कार्रवाई होगी, बल्कि उनके विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।