2 महीने से सूखा पड़ा नल-जल ! सड़क निर्माण ने तोड़ी पाइपलाइन, प्यास से जूझ रहा पूरा गांव
एमपी के बड़वानी जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत होलगांव में जल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। यहां पिछले दो से तीन महीनों से नल-जल योजना पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे करीब 1500 की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, सिलावद से पाटी तक बन रही सड़क के निर्माण के दौरान नल-जल योजना की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद से गांव में पानी की सप्लाई पूरी तरह बंद हो गई। हैरानी की बात यह है कि दो महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी पाइपलाइन की मरम्मत नहीं कराई गई है और न ही पंचायत या प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांव की महिलाएं और बच्चे कई किलोमीटर दूर जाकर नदी, झिरी और खेतों से पानी लाने को मजबूर हैं। ग्रामीण नयन सिंह अलावे बताते हैं कि जिस नदी से वे पानी भरते हैं, उसी में लोग नहाते हैं, कपड़े धोते हैं और मवेशियों को पानी पिलाते हैं। ऐसे में दूषित पानी पीने से गांव में बीमारियां फैलने लगी हैं। पानी की कमी का असर केवल पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि शौचालयों में पानी न होने से लोग खुले में शौच के लिए मजबूर हो रहे हैं, जिससे स्वच्छता अभियान की भी पोल खुलती नजर आ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने जनसुनवाई में भी अपनी समस्या रखी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं इस पूरे मामले में जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग जहां पाइपलाइन टूटने के लिए पीएचई को जिम्मेदार बता रहा है, वहीं पीएचई विभाग इसे सड़क निर्माण की लापरवाही बता रहा है। फिलहाल, होलगांव के लोग गोई नदी की झिरियों से पानी भरकर जैसे-तैसे गुजारा कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक यह गांव प्यासा रहेगा और कब जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?