अनाथ बाघिन बनी मां ! T-54 ने रची सफलता की कहानी, तीन शावकों को दिया जन्म
एमपी के सीधी के संजय टाइगर रिजर्व से एक प्रेरणादायक और गर्व से भर देने वाली खबर सामने आई है। कभी अनाथ हुई बाघिन T-54 अब तीन शावकों की मां बन गई है। यह सफलता वन विभाग की मेहनत, निगरानी और संरक्षण प्रयासों का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। बाघिन T-54 का बचपन बेहद संघर्षपूर्ण रहा। उसकी मां T-32 की मौत उसके जन्म के कुछ समय बाद ही हो गई थी, जिससे वह अनाथ हो गई। ऐसे में वन विभाग ने उसे विशेष एनक्लोजर में रखकर पाला। विशेषज्ञों की टीम ने उसके व्यवहार, भोजन और सुरक्षा पर लगातार काम किया, ताकि वह प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार हो सके।
कड़ी मेहनत और लंबे प्रशिक्षण के बाद जून 2024 में T-54 को जंगल में छोड़ा गया। शुरुआत में उसने धीरे-धीरे अपने क्षेत्र को अपनाया और अब पोड़ी रेंज के जंगल में पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। हाल ही में उसने तीन स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है, जो इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का प्रयास सफल हुआ हो। इससे पहले भी आक्रामक या अनाथ बाघों को रेस्क्यू कर एनक्लोजर में सुधार के बाद जंगल में छोड़ा गया है। T-54 की मां T-32 को भी इसी प्रक्रिया के तहत जंगल में छोड़ा गया था, हालांकि बाद में उसकी मृत्यु हो गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि T-54 का मां बनना मध्य प्रदेश के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है। यह न केवल बाघों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि सही रणनीति और देखरेख से वन्यजीवों का सफल पुनर्वास संभव है। फिलहाल वन विभाग बाघिन और उसके शावकों पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। यह कहानी न सिर्फ संरक्षण की सफलता है, बल्कि यह उम्मीद भी जगाती है कि प्रकृति को सही संरक्षण मिले, तो वह खुद को फिर से संवार सकती है।