भोजशाला पहुंचे प्रवीण तोगड़िया, बोले मूर्ति के साथ पूजा की मिले अनुमति, फिर गरमाया मुद्दा
मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला एक बार फिर सुर्खियों में है। अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद के संस्थापक डॉ. प्रवीण तोगड़िया के दौरे ने इस संवेदनशील मुद्दे को नई चर्चा में ला दिया है। डॉ. तोगड़िया आज भोजशाला के कमाल मौला मस्जिद परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने मां वाग्देवी के दर्शन किए और परिसर में मौजूद धार्मिक प्रतीकों का बारीकी से अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने मौके से लाइव प्रसारण भी किया, जिससे यह दौरा और ज्यादा चर्चा में आ गया।
दौरे के बाद अखंड ज्योति मंदिर परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने भोजशाला को सरस्वती मंदिर बताया। उन्होंने कहा कि वे करीब 23 साल पहले भी यहां आए थे और उस समय भोजशाला का ताला खुलवाने और आंदोलन को गति देने में उनकी अहम भूमिका रही थी। प्रेस से चर्चा के दौरान तोगड़िया ने दावा किया कि परिसर में शिवलिंग, कार्तिकेय स्वामी की मूर्ति, शंकर जी के प्रतीक, कालसर्प यंत्र समेत कई धार्मिक चिन्ह मौजूद हैं, जो इसे मंदिर होने के प्रमाण बताते हैं।
उन्होंने स्पष्ट तौर पर मांग रखी कि यहां मूर्ति के साथ नियमित और निर्बाध पूजा की अनुमति दी जानी चाहिए। साथ ही, पूजा और नमाज की व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जहां मंदिर और मूर्ति है, वहां इस तरह के विवाद बने रहते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से ही होना चाहिए।
डॉ. तोगड़िया ने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की और धार्मिक आस्थाओं के सम्मान पर जोर दिया। इस दौरे को लेकर प्रशासन भी अलर्ट नजर आया। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। फिलहाल, तोगड़िया के इस बयान के बाद भोजशाला का मुद्दा एक बार फिर गर्मा गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी और सामाजिक हलचल बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।