सरकारी शराब दुकानों पर प्राइवेट कब्जा ! MRP से ज्यादा वसूली, नियमों की उड़ रही धज्जियां
मध्य प्रदेश के देवास जिले से शराब दुकानों को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है, जहां ‘सरकारी’ शराब दुकानों पर प्राइवेट लोगों का कब्जा नजर आ रहा है। नई शराब नीति 2026 के तहत जिन दुकानों की नीलामी नहीं हो पाई, उनका संचालन आबकारी विभाग को करना था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। बताया जा रहा है कि जिले की 21 में से कई दुकानों की नीलामी नहीं हो सकी, जिनमें देवास शहर की 6 दुकानें और ग्रामीण इलाकों की कई दुकानें शामिल हैं। इन दुकानों का संचालन विभाग द्वारा किया जाना था, लेकिन यहां प्राइवेट लोग खुलेआम दुकान चला रहे हैं।
सबसे बड़ा खेल कीमतों को लेकर सामने आ रहा है। 75 रुपए के क्वार्टर को 80 रुपए में बेचा जा रहा है। जब ग्राहक सवाल करता है, तो उसे खुले पैसे नहीं होने का बहाना दिया जाता है और बदले में 5 रुपए की पानी की बोतल थमा दी जाती है। यानी ग्राहकों से जबरन अतिरिक्त वसूली की जा रही है। डिजिटल पेमेंट को लेकर भी बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। जहां अधिकारी यह कह रहे हैं कि विभाग के पास कोई आधिकारिक डिजिटल पेमेंट व्यवस्था नहीं है, वहीं दुकानों पर बैठे लोग अपने निजी QR कोड और मोबाइल नंबर पर फोन-पे और गूगल-पे से पैसे ले रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि कई दुकानों पर रेट लिस्ट तक चस्पा नहीं है, जिससे ग्राहक यह जान ही नहीं पाता कि वह सही कीमत दे रहा है या उससे ज्यादा वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, जिन दुकानों पर सरकारी कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, वहां अधिकतर जगह कोई कर्मचारी मौजूद नहीं है। पूरी दुकान प्राइवेट लोगों के भरोसे चल रही है।
देवास से करीब 12 किलोमीटर दूर सिया गांव की दुकान पर तो एक भी सरकारी कर्मचारी नहीं मिला और एक निजी व्यक्ति ही दुकान संचालित करता नजर आया। आबकारी अधिकारी महेश पटेल का कहना है कि विभाग के पास डिजिटल पेमेंट की सुविधा नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत उनके दावों से बिल्कुल उलट दिख रही है। अब सवाल यह है कि आखिर इन ‘सरकारी’ दुकानों पर प्राइवेट राज कब तक चलता रहेगा और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?