एक साल बाद कब्र से निकाली बॉडी, हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्यवाई !
कब्रिस्तान में एक साल से दफ़्न कब्र को खोदने प्रशासन की टीम पहुंची। और कंकाल निकालकर उसे जांच के लिए भेजा है। दरअसल संदिग्ध जान जाने के मामले में बॉडी को हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। मामला जबलपुर का है। जहां मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह ने बीते दिन एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कब्र से बॉडी निकालकर पुनः पोस्टमार्टम कराने का आदेश जारी किया था। जिसका पालन करते हुए याचिकाकर्ता एसडीम के समक्ष समय पर उपस्थित हुए। मदार टेकरी कब्रिस्तान में दफन बॉडी को निकलवाने की प्रक्रिया करीब एक घंटे तक चली। एक साल पुराने कंकाल को निकालकर उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज पीएम के लिए भेजा।
बता दें की जबलपुर निवासी कसीमुद्दीन कुरैशी ने याचिका दायर कर बताया कि उसके भाई गयासुद्दीन कुरैशी जो नरसिंहपुर जिले के बोरीपार गांव में रहते थे। 26 मार्च 2025 को एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें पहले जबलपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिर 27 मार्च को इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया। जहां उनकी जान चली गई। याचिकाकर्ता के मुताबिक अस्पताल की डिस्चार्ज रिपोर्ट में सीने में चोट के निशान का जिक्र था। जिससे डेथ को सामान्य नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर उन्होंने दोबारा पीएम और जांच की मांग की थी। इससे पहले हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि पहले पीएम में कोई गड़बड़ी या कानूनी उल्लंघन हुआ हो। केवल चोट का जिक्र होना दोबारा पोस्टमार्टम का पर्याप्त आधार नहीं है।
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से बताया गया कि थाना स्टेशन गंज नरसिंहपुर पुलिस ने प्रारंभिक जांच की थी और मामला एफआईआर दर्ज करने योग्य नहीं पाया गया। इस पर युगलपीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सवाल किया कि बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस जांच कैसे कर सकती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह कानून और सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों की अनदेखी है। कोर्ट ने नरसिंहपुर एसपी को व्यक्तिगत रूप से हलफनामा पेश करने के निर्देश भी दिए थे। मामले की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अब बॉडी निकालकर दोबारा पीएम कराने का आदेश पारित किया है।------