पुलिस ने दौड़ाकर पकड़े आरोपी, अपहरण-फायरिंग से हड़कंप, आरक्षक पर भी उठे सवाल
एमपी के दतिया जिले में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो गए हैं कि एक ही दिन में अपहरण और फायरिंग की घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस वारदात में एक पुलिस आरक्षक का नाम भी सामने आया है, जिससे कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 वर्षीय विजय रावत, जो एक फाइनेंस कंपनी में रिकवरी एजेंट के रूप में काम करता है, ने बकाया किस्त न चुकाने पर बद्री बाथम की बाइक जब्त की थी। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ और मामला हिंसा तक पहुंच गया।
बताया जा रहा है कि आरोपी बोलेरो वाहन में सवार होकर एक एमपी ऑनलाइन सेंटर पहुंचे, जहां विजय रावत मौजूद था। यहां आरोपियों ने जमकर गाली-गलौज, मारपीट और तोड़फोड़ की। बीच-बचाव करने आए हिमांशु यादव को भी पीटा गया। इसके बाद आरोपियों ने विजय को जबरन वाहन में बैठाकर अपहरण कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और आरोपियों का पीछा शुरू किया। कुछ दूरी तक पीछा करने के बाद पुलिस ने वाहन को रोक लिया। इस दौरान कुछ आरोपी मौके से फरार हो गए, लेकिन छोटू मांझी और बंटी मुसलमान को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में राजपाल मांझी, जो दीनारा थाने में पदस्थ आरक्षक है, का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह घटना के समय ड्यूटी पर नहीं था, लेकिन उसकी भूमिका की जांच की जा रही है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन्हीं आरोपियों ने इससे पहले गिरजा देवी नाम की महिला पर फायरिंग की थी, जिससे इलाके में पहले ही डर का माहौल था। पुलिस ने अपहरण, मारपीट और फायरिंग के तहत मामला दर्ज कर लिया है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। अब बड़ा सवाल यही है—जब कानून के रखवालों पर ही सवाल उठने लगें, तो आम जनता खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेगी?