धड़ल्ले से चल रहा अवैध बोरिंग खेल: प्रशासन की रोक बेअसर, रात में हो रहा खनन
एमपी के हरदा जिले में भू-जल संरक्षण को लेकर प्रशासन भले ही सख्त नजर आ रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत पूरी तरह अलग तस्वीर पेश कर रही है। 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक निजी नलकूप खनन पर पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद अवैध बोरिंग का कारोबार खुलेआम जारी है। कलेक्टर के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बोरिंग माफिया रात के अंधेरे में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बाहरी राज्यों से मशीनें मंगाकर स्थानीय एजेंटों के जरिए खेतों में अवैध नलकूप खनन किया जा रहा है। यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी है, बल्कि आने वाले समय में गंभीर जल संकट की चेतावनी भी है।
हाल ही में पुलिस ने दो अलग-अलग स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध बोरिंग मशीनों को जब्त किया है। थाना छीपाबड़ क्षेत्र के ग्राम मुहाल में खेत में अवैध खनन करते हुए मशीन पकड़ी गई, वहीं सिराली थाना क्षेत्र के ग्राम सुंदरपानी में खनन कर लौट रही मशीन को पुलिस ने पकड़ लिया। पुलिस जांच में सामने आया कि बोरिंग संचालकों के पास किसी भी प्रकार की वैध अनुमति या दस्तावेज नहीं थे। इसके बाद मशीनों को जब्त कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, इस अवैध कारोबार में 200 रुपये प्रति फीट तक की वसूली की जा रही है, जिससे यह धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय एजेंट और माफिया मिलकर इस पूरे नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं।
हालांकि पुलिस की यह कार्रवाई एक चेतावनी जरूर है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह अवैध कारोबार कब तक यूं ही चलता रहेगा। प्रशासन की सख्ती के बावजूद अगर नियमों का उल्लंघन जारी है, तो निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं। फिलहाल जरूरत है लगातार सख्ती, निगरानी और कड़ी कार्रवाई की, ताकि भू-जल संरक्षण के इस अभियान को सफल बनाया जा सके और आने वाले समय में जल संकट से बचा जा सके।