MP बोर्ड में 16 साल का रिकॉर्ड टूटा: 12वीं में 76.01% पास, सरकारी स्कूलों ने मारी बाजी!
मध्यप्रदेश में इस साल बोर्ड परीक्षा के नतीजों ने नया इतिहास रच दिया है। माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित 10वीं और 12वीं के रिजल्ट में इस बार 16 वर्षों का रिकॉर्ड टूट गया है। खासतौर पर 12वीं का परिणाम 76.01 प्रतिशत रहा, जो पिछले डेढ़ दशक में सबसे बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वयं रिजल्ट जारी करते हुए इसे शिक्षा क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही छात्रहित योजनाओं और लगातार किए जा रहे नवाचारों का असर अब साफ तौर पर नजर आने लगा है।
इस साल 10वीं का कुल पास प्रतिशत 73.42% रहा, जबकि 12वीं में 76.01% छात्र-छात्राएं सफल हुए। हर साल की तरह इस बार भी लड़कियों ने लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। सबसे खास बात यह रही कि जनजातीय और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन किया। इन क्षेत्रों में रिजल्ट का बेहतर होना इस बात का संकेत है कि अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दूर-दराज इलाकों तक पहुंच रही है और सरकारी योजनाएं जमीन पर असर दिखा रही हैं।
एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि शासकीय स्कूलों के छात्रों ने निजी स्कूलों से बेहतर प्रदर्शन किया। 10वीं में सरकारी स्कूलों का पास प्रतिशत 76.80% रहा, जो शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा संकेत है। सरकार की स्कूटी, साइकिल, लैपटॉप वितरण, मेधावी छात्र सम्मान योजना और सांदीपनी स्कूल जैसी योजनाओं ने छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाया है। इन पहलों से न केवल पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है, बल्कि ड्रॉपआउट दर में भी कमी आई है और शासकीय स्कूलों में नामांकन में इजाफा हुआ है। कुल मिलाकर, इस बार का रिजल्ट न सिर्फ आंकड़ों में बेहतर है, बल्कि यह प्रदेश में शिक्षा के बदलते परिदृश्य और उज्जवल भविष्य की तस्वीर भी पेश करता है।