बाघ का खौफ ! गांव में घुसकर दो मवेशियों का शिकार, हाथियों संग रेस्क्यू जारी
एमपी के सागर संभाग के पन्ना टाइगर रिजर्व से सटे गांवों में एक बार फिर बाघ का खौफ देखने को मिल रहा है। जसवंतपुरा के बाद अब विक्रमपुर गांव में बाघ के घुसने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बुधवार 16 अप्रैल को बाघ ने रिहायशी इलाके के पास पहुंचकर दो मवेशियों को अपना शिकार बना लिया, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों के मुताबिक, बाघ की दहाड़ सुनते ही लोग अपने घरों में कैद हो गए। खेतों और खुले इलाकों में जाना बंद कर दिया गया है। करीब 2000 की आबादी वाले इस गांव में डर का माहौल साफ देखा जा सकता है।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेंद्र पटेल ने बताया कि सूचना मिलते ही विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई। बाघ को सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने के लिए तीन हाथियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि घनी झाड़ियों और बस्ती के कारण यह ऑपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, यह बाघिन करीब 2 साल की है और बाघिन 213 की चौथी संतान है। इससे पहले भी दो दिन पहले जसवंतपुरा क्षेत्र में इसने एक भैंस का शिकार किया था। लगातार हो रही घटनाओं से साफ है कि बाघ का मूवमेंट गांवों की ओर बढ़ रहा है।
वन विभाग ने ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी है कि वे अकेले खेतों या सुनसान रास्तों पर न जाएं और सतर्कता बरतें। साथ ही यह भी आश्वासन दिया गया है कि जिन पशुपालकों के मवेशियों का शिकार हुआ है, उन्हें विभागीय नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। फिलहाल, पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और टीम लगातार बाघ की निगरानी कर रही है। यह घटना एक बार फिर इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की ओर इशारा करती है, जहां विकास और वन्य जीवन के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।