15 दिन में निपटेंगे लंबित मामले, अधिकारियों को अल्टीमेटम, मानव अधिकार आयोग सख्त
एमपी के सागर संभाग के छतरपुर में मध्य प्रदेश राज्य मानव अधिकार आयोग ने लंबित मामलों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने जिले के दौरे के दौरान समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का निपटारा तय समय सीमा में किया जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में कलेक्टर, एसपी, जिला शिक्षा अधिकारी सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर कार्यालय से जुड़े करीब 45 से 50 मामलों और पुलिस विभाग के 15 प्रकरणों की विस्तार से समीक्षा की गई। कई मामलों में देरी को लेकर आयोग ने नाराजगी भी जताई।
डॉ. अवधेश प्रताप सिंह ने साफ कहा कि लंबे समय से लंबित मामलों को 7 से 15 दिन के भीतर निपटाया जाए, जबकि अधिकतम एक माह की समय सीमा तय की गई है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई। आयोग अध्यक्ष ने निर्देश दिए कि डूबने या बिजली गिरने जैसी घटनाओं में पीड़ित परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए। कई मामलों में लंबित भुगतान को तत्काल जारी करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा, करीब 14 नए आवेदनों पर भी सुनवाई की गई, जिनमें लोगों ने अपनी समस्याएं आयोग के सामने रखीं। इन पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। गर्मी के मौसम को देखते हुए आयोग अध्यक्ष ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी सख्ती दिखाई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी की टंकियों की नियमित जांच हो और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या से बचा जा सके।
डॉ. सिंह ने इस दौरान यह भी कहा कि मानवाधिकारों के संरक्षण में प्रशासन के साथ-साथ मीडिया और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। खासतौर पर बुजुर्गों और पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है। कुल मिलाकर, आयोग के इस सख्त रुख से प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है और अब सभी की नजरें तय समय में कार्रवाई पर टिकी हैं।