सागर- बीच तालाब में सजी शेरों शायरी की महफ़िल, शेर और कविताओं पर गूंजा वाह...वाह... | SAGAR TV NEWS |
सागर के इतिहास में संभवतः पहली बार बीच तालाब में एक अनोखी महफ़िल सजी। जहां क्रूज़ मुशायरा आयोजित किया गया। वहीं जमकर शेरों शायरी का भी दौर चला। तो शेर पर वाह-वाह की गूँज भी सुनाई दी। घर की दीवार हिल नहीं सकती, उसकी बुनियाद का मैं पत्थर हूं। मुशायरे में जमुना प्रसाद बेताब ने अपनी इन पंक्तियों से प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में केवल गजलें ही नहीं, बल्कि बुंदेली लोक रंग भी देखने को मिला। वरिष्ठ लोक गायक देवी सिंह राजपूत ने बुंदेली गीत बिजनैयां डुलाओ गोरी की प्रस्तुति से माहौल बना दिया।
बता दें की सागर में लाखा बंजारा झील पर प्रदेश भर के शायर तशरीफ़ लाये। जहां 18 कवि और शायर जुड़े जिन्होंने शेरों शायरी और अलग-अलग रचनाओं से समा बांध दिया। दरअसल साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्था काव्यायन और कसक फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में पहली बार सागर की झील में क्रूज पर भव्य मुशायरा हुआ।
इस दौरान लखन शब्दाक्षरी ने आज के समय में संवेदनाओं की अहमियत को दशति हुए संदेश दिया अगर तुम वेद पढ़कर वेदना पढ़ना नहीं सीखे। आमिल हबीबी छतरपुर ने कहा जिंदगी तो जिंदगी है कांच की प्याली नहीं, टूट जायेगी तो कैसे दूसरी आ जायेगी से जीवन की नाजुकता को बयां किया। कालापीपल की डॉ. साक्षी जैन ने शेर जहाँ भर की दौलत फीकी हैं तेरे प्रेम के आगे, तेरी नबर पड़ते ही मां मेरा जीवन संवर जाता है
वृंदावन राय सरल ने कहा वक्त तेरे हाथों में, आदमी खिलौना है। तू कहे तो सस्ता है तू कहे तो महंगा है। डॉ. गजाधर सागर ने कहा वह मुकद्दर मूवी होते हैं। ह्यथ जिनके मशीन होते हैं। सिराज सगारी ने कहा जो समझदार हैं समझते हैं। वजन बैलों पे है कि कुन्ते पर। अमित आठिया ने कहा साथ तेरे जो गुजरे पल वही तो नादिर हैं। वे तेरे मगर फीके, आज सब मानजिर हैं। सुरेश जायसवाल सीहोर ने कहा उसके जैसे भी हो के देख लिया। कुछ भी बदल न हू-ब-हूहोकर। इसके अलावा अन्य लोगों ने भी प्रस्तुतियां दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विधायक शैलेंद्र जैन ने की। वहीं दूसरे सत्र की अध्यक्ष एड. रामनरेश सिंह राजपूत ने की।