सागर-अखाड़ा गुरु दाऊ जी पंचतत्व में विलीन,पद्मश्री भगवानदास को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को नई पहचान दिलाने वाले पद्मश्री 2026 के लिए चयनित ‘दाऊ’ जी पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके निधन से न केवल सागर बल्कि पूरे बुंदेलखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। रविवार दोपहर नरयावली नाका मुक्तिधाम में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। 83 वर्षीय दाऊ जी लंबे समय से अस्वस्थ थे और भोपाल के एम्स में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही समाज के हर वर्ग में शोक का माहौल छा गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शहरवासी शामिल हुए।
राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में प्रशासन की ओर से एसडीएम अमन मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पुलिस बल ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, कलेक्टर प्रतिभा पाल और अन्य जनप्रतिनिधियों ने दाऊ जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दाऊ जी का जाना प्रदेश और खासकर बुंदेलखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है।
भगवानदास रायकवार ने अपना पूरा जीवन अखाड़ा परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों के कारण यह पारंपरिक कला न केवल देशभर में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकी। उन्होंने कई युवाओं को इस कला से जोड़ा और इसे जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दाऊ जी का जीवन संघर्ष, समर्पण और संस्कृति के प्रति प्रेम का प्रतीक रहा। उनके निधन के साथ ही एक युग का अंत हो गया, लेकिन उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।