Sagar - पुस्तके पढ़ने से बदल रही स्टूडेंटों की जिंदगी, इतिहास विभाग में गूंजी प्रेरणा की गूंज
सागर के डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में विश्व पुस्तक दिवस के आयोजन में ज्ञान और प्रेरणा का अनूठा संगम देखने को मिला। समन्वयक प्रो. बी. के. श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में शोधार्थियों ने विभिन्न मोटीवेशनल पुस्तकों का वाचन कर उनके संदेशों को साझा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विभागाध्यक्ष प्रो. अशोक अहिरवार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, इतिहास स्वयं में एक महान प्रेरणा है। जब विद्यार्थी अपने शोध के साथ-साथ उच्च श्रेणी का प्रेरक साहित्य पढ़ते हैं, तो उनका दृष्टिकोण अधिक व्यापक और दृष्टि अधिक स्पष्ट होती है।
वहीं प्रो. बी. के. श्रीवास्तव ने पुस्तकों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, आज के डिजिटल युग में पुस्तकें मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने और एकाग्रता बढ़ाने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। ये हमें जीवन की चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से सुदृढ़ बनाती हैं।
इतिहास विभाग में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रत्येक शोधार्थी ने अपनी पसंदीदा पुस्तक के माध्यम से जीवन के अनमोल सूत्र साझा किए:
अभिलाषा राजपूत ने अपने हर विचार पर ना करें विश्वास पुस्तक का सार साझा करते हुए कहा कि सकारात्मक विचार हमें जीवन में कुछ भी हासिल करने की शक्ति देते हैं। उन्होंने संदेश दिया कि पुस्तकें हमारी सच्ची मित्र हैं और हमें केवल विशेष दिनों विश्व पुस्तक दिवस पर ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन पठन-पाठन की आदत डालनी चाहिए।
शिवानी प्रजापतिः काल करे सो अब कर पुस्तक का वाचन करते हुए शिवानी ने एक महत्वपूर्ण लक्ष्य रखा कि हमें सालमें कम से कम 100 किताबें पढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुस्तकें हमें दूसरों के वर्षों के अनुभव को कुछ घंटों में सीखने का अवसर देती हैं। आज के डिजिटल युग में जहाँ ऑनलाइन पुस्तकें हमारी नींद को बाधित करती हैं वहीं पुस्तके पढ़ कर सोने से अच्छी एवं गहरी नींद भी आती है।
विशेष जोथे ने अपने द्वारा पढ़ी गई पुस्तक का सार साझा करते हुए कहा लक्ष्य निर्धारण और संकट के समय धैर्य पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि हमारी सोच ही हमारे दुखों का मूल कारण होती है। यदि हम अपनी सोच की दिशा बदल लें, तो अपने पूरे जीवन का कायाकल्पकर सकते हैं।
अभय सिंह चौहानः इन्होंने व्यक्तित्व विकास और महान नायकों के जीवन संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने गौतम बुद्ध का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर हम अपने व्यक्तित्व को निखार सकते हैं।
इसके अलावा विजयप्रकाश सिंह, अतुल सिंह चंदेल, करुणा सिंह राजपूत, शुभम अहिरवार, प्रियंका कुमारी, दुर्गेश ने भी मार्गदर्शक पुस्तकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया