बेलगाम रेत माफिया ! वनरक्षक की हत्या के बाद भी जारी काला कारोबार, सिस्टम पर उठे सवाल
मध्यप्रदेश के मुरैना में चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन का काला खेल थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में वनरक्षक की हत्या जैसी गंभीर घटना के बाद भी हालात जस के तस हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, वीरपुर, कुठियानें और बटेश्वरा घाट जैसे संवेदनशील इलाकों में आज भी खुलेआम रेत निकासी की जा रही है। रात हो या दिन, ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपरों के जरिए अवैध रेत का परिवहन जारी है। हैरानी की बात यह है कि नेशनल हाईवे-44 के बिस्मिल नगर और NH-552 के नंदपुरा चौराहे पर अवैध रेत की मंडियां खुलेआम सज रही हैं। यहां रेत की खरीद-फरोख्त बिना किसी डर के हो रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक वनरक्षक की जान जाने के बाद भी आखिर सिस्टम क्यों नहीं जागा? इस घटना ने एक परिवार को उजाड़ दिया, लेकिन इसके बावजूद रेत माफिया के हौसले कम नहीं हुए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है, जिसके चलते माफिया बेखौफ होकर अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि इससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक सख्त कार्रवाई करता है और क्या रेत माफिया पर लगाम लग पाती है या फिर चंबल का यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा।