हाईकोर्ट सख्त! 90 दिन में फैसला नियम पर सवाल, 720 दिन बाद भी सप्रे केस लंबित क्यों? | SAGAR TV NEWS
मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल मचाने वाले निर्मला सप्रे दलबदल मामले पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट ने दलबदल मामलों में 90 दिन के भीतर फैसला देने की गाइडलाइन तय की है, तो फिर 720 दिन बीतने के बाद भी निर्णय क्यों नहीं हुआ? बुधवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजीव कुमार सचदेवा ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन को विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के संज्ञान में लाया जाए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 जून को तय की है।
यह मामला बीना विधायक निर्मला सप्रे की विधायकी शून्य करने की मांग से जुड़ा है, जिस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने याचिका दायर की है। कोर्ट ने पहले ही संबंधित पक्ष से जवाब मांगा था, जिस पर महाधिवक्ता ने बताया कि स्पीकर द्वारा विधिवत सुनवाई जारी है और साक्ष्यों की जांच हो रही है। वहीं, सिंघार पक्ष के वकील ने कोर्ट से मांग की कि 90 दिन की समय सीमा का सख्ती से पालन कराया जाए।
इस बीच, मामला एक नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। कांग्रेस द्वारा जारी तीन लाइन व्हिप सप्रे के पक्ष में मजबूत कानूनी आधार बन सकता है। 27 अप्रैल को विशेष सत्र के लिए जारी इस व्हिप को सप्रे को ईमेल से भी भेजा गया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस अब भी उन्हें अपना विधायक मानती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्रे यह तर्क दे सकती हैं कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है, जिससे दलबदल का मामला कमजोर पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले कोर्ट ने सिंघार से सप्रे के बीजेपी में शामिल होने के ठोस सबूत मांगे थे, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट और तस्वीरों को पर्याप्त नहीं माना गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 90 दिन की सीमा का पालन होगा, या फिर यह मामला और लंबा खिंचेगा? फिलहाल, सबकी नजर 18 जून की अगली सुनवाई पर टिकी है।