गेहूं बेचने को तरसे किसान ! खरीदी केंद्रों पर हाहाकार ! किसान परेशान, अव्यवस्था से बढ़ी मुश्किलें
मध्य प्रदेश के हरदा जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की हकीकत अब किसानों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। व्यवस्था सुधार के दावों के बीच जमीनी हालात बेहद चिंताजनक हैं। किसान अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हरदा जिले के अलग-अलग खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था का आलम साफ नजर आ रहा है।
पहले स्लॉट बुकिंग की समस्या से जूझ रहे किसान अब मजदूरों की कमी और धीमी तुलाई प्रक्रिया से परेशान हैं। कई किसानों का कहना है कि उन्हें अपनी बारी के लिए 4 से 5 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इस दौरान ट्राली का किराया रोजाना 1000 से 2000 रुपए तक देना पड़ रहा है, जिससे उनकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थिति इतनी खराब है कि कुछ किसान मजबूरी में मंडियों में कम दाम पर ही गेहूं बेचने को मजबूर हो गए हैं। सुल्तानपुर वेयरहाउस जैसे बड़े केंद्रों पर भी मजदूरों की भारी कमी है, जिसके चलते किसान खुद के पैसे से मजदूर बुलाकर तुलाई करा रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि तुलाई के दौरान भी गड़बड़ी हो रही है। एक ट्रॉली पर 15 किलो तक गेहूं की कटौती किए जाने की बात सामने आई है। इसके अलावा खरीदी केंद्रों पर छाया, पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे भीषण गर्मी में किसान और उनके परिवार बेहद परेशान हो रहे हैं।
समिति प्रबंधक और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि व्यवस्थाओं को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन फिलहाल हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आ रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकार किसानों को समर्थन मूल्य पर फसल बेचने की गारंटी देती है, तो जमीनी स्तर पर ये अव्यवस्था क्यों? फिलहाल किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि प्रशासन जल्द ठोस कदम उठाएगा, ताकि उनकी मेहनत का सही मूल्य मिल सके।