लपेटे में आये नेता जी, कद्दावर कांग्रेस नेता को भेजा जेल, वन कर्मियों पर हमले का आरोप !
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद जेल पहुंचा दिया है। वन कर्मियों पर हमले के मामले में पुलिस ने उनके खिलाफ कार्यवाई की। हालांकि इस मामले में उन्होंने अपने आपको निर्दोष करार देते हुए इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया है। मामला पन्ना जिले का है। जहां अवैध उत्खनन रोकने गई वन विभाग की टीम पर हमले और लूट के मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी बनाए गए पन्ना के कद्दावर कांग्रेस नेता और पूर्व विधानसभा प्रत्याशी भरत मिलन पाण्डेय को पुलिस ने जबलपुर से हिरासत में लिया है। जिन्हे मेडिकल परीक्षण के बाद न्यायालय में पेश किया गया। जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह पूरा मामला बीते 23 अप्रैल का है। जब पन्ना विधानसभा क्षेत्र के धरमपुर रेंज के पिस्टा बीट में अवैध पत्थर उत्खनन की सूचना मिली थी। जिस पर वनपाल महीप कुमार रावत अपनी टीम के साथ मौके पर कार्रवाई करने पहुंचे थे। आरोप है कि वहां पत्थर माफिया और उसके साथियों ने टीम पर हमला बोल दिया। शिकायत के मुताबिक, घटना के दौरान भरत मिलन पाण्डेय भी वहां पहुंचे। यह भी आरोप है कि उन्होंने न केवल वनकर्मियों को धमकाया, बल्कि आरोपियों को मौके से भगाने में मदद की। साथ ही वन विभाग की टीम से मोबाइल और चाबियां भी छीन ली गईं।
जबलपुर से गिरफ्तारी के बाद भरत मिलन पाण्डेय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने इसे एक राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि एफआईआर में शुरुआत में उनका नाम नहीं था, जिसे बाद में राजनीतिक दबाव के चलते जोड़ा गया। वह पुलिस से बचने नहीं, बल्कि अपने इलाज के लिए जबलपुर गए थे। पन्ना पुलिस की कार्रवाई के बाद भरत मिलन पाण्डेय को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजा। दिलचस्प बात ये है की इस केस की सुनवाई के लिए बुद्ध पूर्णिमा के अवकाश के दिन दो घंटे के लिए न्यायालय खोला गया था। भरत मिलन पाण्डेय पन्ना की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं। वह 2023 में कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इसके अलावा, वह तब राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आए थे जब वह अपने बेटे की बारात हेलीकॉप्टर से अपने गावं पिस्टा से पन्ना लेकर आये थे। फ़िलहाल अब मामले में राजनीति भी हो रही है कांग्रेस इसे सत्ता पक्ष का दबाव बता रही है। वहीं प्रशासन निष्पक्ष जांच की बात कह रहा है।