बुलडोजर से 7 आदिवासी परिवार बेघर, PM आवास भी ढहा… दस्तावेज दिखाते रह गए लोग !
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक संवेदनशील और विवादित मामला सामने आया है, जहां प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई ने 7 आदिवासी परिवारों को बेघर कर दिया। मामला वार्ड क्रमांक 11 का है, जहां प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ पहुंचा और कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। देखते ही देखते इन परिवारों के घर जमींदोज कर दिए गए और लोग खुले आसमान के नीचे आ गए।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिन मकानों को अवैध बताकर तोड़ा गया, उन परिवारों के पास जमीन के वैध पट्टे होने का दावा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये पट्टे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में दिए गए थे और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी मिला था।
प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्होंने कार्रवाई के दौरान अपने दस्तावेज अधिकारियों को दिखाने की कोशिश की, लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। यहां तक कि एक प्रधानमंत्री आवास को भी बुलडोजर से ढहा दिया गया, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ गया है। कार्रवाई के दौरान कई महिलाएं और बुजुर्ग रोते-बिलखते नजर आए। उनका सवाल है कि जब सरकार ने खुद जमीन का पट्टा दिया और घर बनवाया, तो अब उसे अवैध कैसे घोषित किया जा सकता है?
इस कार्रवाई से करीब दो दर्जन से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। भीषण गर्मी में अब इनके सामने रहने और खाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। मीडिया के सवालों से बचते नजर आए अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। फिलहाल इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल है। प्रभावित परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहे हैं और इस कार्रवाई पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।