एलिवेटेड ब्रिज पर घमासान, 200 दुकानों पर संकट, कलेक्टर ऑफिस पहुंचे व्यापारी
एमपी के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच अब विकास कार्यों को लेकर विवाद भी गहराने लगा है। शहर में प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज परियोजना के खिलाफ व्यापारी खुलकर सामने आ गए हैं और इसे अपने अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं। देवास गेट से गधा पुलिया क्षेत्र तक के सैकड़ों व्यापारी आज जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। व्यापारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए इस परियोजना को लेकर गंभीर चिंताएं जताईं।
दरअसल, सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए रेलवे क्षेत्र में एलिवेटेड ब्रिज और सड़क चौड़ीकरण का काम प्रस्तावित है। लेकिन इस योजना से स्थानीय व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है। उनका कहना है कि पहले भी सिंहस्थ 2016 के दौरान उन्होंने 30 फीट तक जमीन और कई मामलों में पूरे मकान तक प्रशासन को दिए थे। अब एक बार फिर दुकानों और मकानों को हटाने की बात सामने आने से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ गई है। उनका दावा है कि इस परियोजना से करीब 180 से 200 दुकानें प्रभावित होंगी, जिनसे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है।
व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि एलिवेटेड ब्रिज बनाना जरूरी है, तो इसका डिजाइन बदला जाए और इसे रेलवे लाइन की ओर शिफ्ट किया जाए, ताकि कम से कम नुकसान हो। व्यापारियों का यह भी कहना है कि मामला अब न्यायालय तक पहुंच चुका है और करीब 40 से 45 लोगों को कोर्ट से स्टे भी मिल चुका है। इसके बावजूद यदि कार्रवाई होती है, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन होगा। व्यापारियों का साफ कहना है कि यह सिर्फ दुकान बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि उनके परिवार और भविष्य का सवाल है। फिलहाल प्रशासन और व्यापारियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन जिस तरह से विरोध तेज हो रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी तूल पकड़ सकता है।