छलका घर वापसी का दर्द, बंगाली समाज का जश्न! सोनार बांग्ला की उम्मीद में बंटी मिठाइयां| SAGAR TV NEWS
एमपी के ग्वालियर में रहने वाले बंगाली परिवारों के बीच इन दिनों खुशी और उम्मीद का माहौल देखने को मिल रहा है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बदलाव और भाजपा की बड़ी जीत की चर्चाओं के बीच शहर के बंगाली समाज ने मिठाइयां बांटकर और एक-दूसरे को झालमुड़ी खिलाकर जश्न मनाया। ग्वालियर की कई कॉलोनियों और बस्तियों में रहने वाले बंगाली परिवारों ने इसे सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि अपने भविष्य और “सोनार बांग्ला” की उम्मीद से जोड़कर देखा। वर्षों पहले बंगाल में हिंसा, बेरोजगारी और असुरक्षा के कारण अपना घर छोड़कर मध्यप्रदेश आए परिवार अब फिर से अपने पुश्तैनी घरों की यादों में खोए नजर आए।
24 परगना से जुड़े प्रवीण मित्रा ने कहा कि उनका घर और जमीन आज भी बंगाल में है, लेकिन हालातों के कारण उन्हें ग्वालियर आकर बसना पड़ा। उनका कहना है कि अब माहौल बदलने की उम्मीद जगी है और वे चाहते हैं कि आने वाली दीपावली अपने पुश्तैनी घर में मनाएं। वहीं रजनी मित्रा ने बताया कि बेटियों की सुरक्षा और खराब परिस्थितियों ने उन्हें बंगाल छोड़ने पर मजबूर किया था। उन्होंने कहा कि अब परिवार को भरोसा है कि आने वाले समय में हालात बेहतर होंगे और लोग बिना डर के अपने त्योहार मना सकेंगे।
गायत्री सरकार और रूपेंद्र सरकार जैसे कई परिवारों ने कहा कि सालों से बंगाल लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे, लेकिन अब उन्हें बदलाव की उम्मीद दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि बंगाल में रोजगार, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई शुरुआत हो सकती है। ग्वालियर में बंगाली समाज का यह जश्न सिर्फ खुशी का इजहार नहीं, बल्कि उन यादों और उम्मीदों का प्रतीक बन गया है, जो वर्षों से अपने घर लौटने का सपना देख रही थीं। अब इन परिवारों की नजरें बंगाल के बदलते माहौल और “सोनार बांग्ला” के सपने पर टिकी हैं।