सागर में मानवता की मिसाल, किरण सिंघई के निधन के बाद परिवार ने कराया नेत्रदान और देहदान
सागर शहर में मानवता, सेवा और संवेदनशीलता की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। नगर के प्रख्यात समाजसेवी एवं महान देहदानी स्वर्गीय इंजीनियर प्रकाशचंद्र सिंघई की धर्मपत्नी किरण सिंघई के निधन के बाद उनके परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पहले नेत्रदान और फिर देहदान कराया।
77 वर्षीय किरण सिंघई का मंगलवार सुबह निधन हो गया। दुख की इस घड़ी में भी परिवार ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय के आई बैंक से संपर्क किया। मेडिकल टीम ने उनके निवास पहुंचकर दोनों आंखों का कॉर्निया सुरक्षित निकाला, जिससे जरूरतमंद लोगों को नई रोशनी मिल सकेगी।
नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजनों ने उनके पार्थिव शरीर को बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग को देहदान कर दिया। यह देहदान मेडिकल छात्रों की शिक्षा और शोध कार्यों में उपयोग किया जाएगा।
किरण सिंघई की अंतिम यात्रा इतवारी वार्ड स्थित निवास से निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। अंतिम यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय पहुंची।
महाविद्यालय में मध्यप्रदेश शासन की ओर से स्वर्गीय किरण सिंघई को राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। यह सम्मान उनके परिवार की समाजसेवा और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक बना।
इस अवसर पर विधायक शैलेंद्र जैन, डीन डॉ. पी. एस. ठाकुर, डॉ. प्रवीण खरे सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने कहा कि सिंघई परिवार का यह कदम समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और इससे लोग अंगदान एवं देहदान के लिए जागरूक होंगे।
सादगी, सेवा और संवेदनशीलता से भरा श्रीमती किरण सिंघई का जीवन अब मानवता के संदेश के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।