जीते जी किया पिंडदान फिर पूरे गांव को खिलाई खुद की तेरहवीं, चर्चा का विषय बने ये शख्स SAGAR TV NEWS
क्या आपने कभी सुना है की किसी शख्स ने जीते जी खुद अपना पिंडदान कराया हो और अपनी तेरहवीं भी करा दी हो। इसी तरह का एक अनोखा मामला सामने आया जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है। एमपी के सतना जिले में रहने वाले पर्यावरण प्रेमी जिनकी तारीफ मन की बात में खुद प्रधानमंत्री मोदी भी कर चुके हैं। उन्होंने खुद अपनी तेरहवीं के कार्ड छपवाए लोगों को आमंत्रित किया और अपनी तेरहवीं का भोज खिलवाया। जिसके बाद हर कोई हैरान है। वहीं वो देहदान का संकल्प भी ले चुके हैं। आपको नज़र आने वाले ये सतना जिले के उचेहरा क्षेत्र में रहने वाले 70 साल के रामलोटन कुशवाहा हैं। जिन्होंने जीते-जी अपनी तेरहवीं कर समाज को अनोखा संदेश दिया। देहदान के फैसले पर मिल रहे तानों से आहत होकर उन्होंने प्रयागराज में पिंडदान किया। फिर गांव में तेरहवीं भोज का आयोजन कर सबको चौंका दिया।
बता दें की अतरबेदिया निवासी रामलोटन कुशवाहा ने कुछ समय पहले सरकारी मेडिकल कॉलेज सतना में देहदान का संकल्प लिया था। जिसके बाद गांव और रिश्तेदारों में कई तरह की चर्चाएं हुई। लोगों ने उन पर तेरहवीं और अंतिम संस्कार का खर्च बचाने के आरोप लगाए। लगातार तानों से परेशान रामलोटन कुशवाहा ने अब जो किया वह चर्चा का विषय बन गया। उन्होंने प्रयागराज जाकर अपना पिंडदान कराया। इसके बाद बीते 13 मई को अपने गांव में तेरहवीं का आयोजन किया। जिसके लिए शोक संदेश कार्ड छपवाकर रिश्तेदारों और ग्रामीणों को आमंत्रित किया था। तेरहवीं में सैंकड़ों लोग शामिल हुए।
वैसे रामलोटन कुशवाहा औषधीय पौधों और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए पूरे देश में पहचाने जाते हैं। वे पद्मश्री बाबूलाल दाहिया के निर्देशन में कई दुर्लभ वनस्पतियों को बचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने अपने छोटे से परिसर में एक देशी म्यूजियम भी बनाया है। जिसमें उन्होंने दहीमन, भटकटैया और लौकी जैसी कई विलुप्त होती वनस्पतियों को सहेज कर रखा है। जैव विविधता संरक्षण और दुर्लभ पौधों को बचाने उन्हें साल 2024 में राज्यस्तरीय प्रथम श्रेणी पुरस्कार भी मिल चुका है।