महाकाल की जमीन पर कमल का कब्जा? सिंहस्थ 2028 से पहले बीजेपी विधायक पर बड़ा घोटाले का आरोप !
एक तरफ बीजेपी खुद को धर्म और विकास की सबसे बड़ी पार्टी बताने में लगी है… तो दूसरी तरफ उसी पार्टी के नेताओं पर अब महाकाल मंदिर की जमीन पर कब्जे जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं। उज्जैन में महाकाल मंदिर की पार्किंग के लिए इस्तेमाल हो रही सरकारी जमीन को निजी बताकर करोड़ों का सौदा करने का मामला सामने आया है। आरोप सीधे बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय और उनकी कंपनी पर लगे हैं। मामला इतना बड़ा है कि शिकायत लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू और हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है। पूरा विवाद करीब 45 हजार वर्गफीट जमीन से जुड़ा है। आरोप है कि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज थी और इसका उपयोग महाकाल मंदिर की पार्किंग के रूप में हो रहा था।
लेकिन बाद में रिकॉर्ड में बदलाव कर इसे निजी भूमि बताया गया और 2 मार्च 2026 को 3 करोड़ 82 लाख रुपए में सौदा कर दिया गया। बताया जा रहा है कि खरीदार कंपनी यूटोपिया बोटल एंड रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टरों में आलोट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय और उनके साझेदार इकबाल सिंह गांधी शामिल हैं। अब इसी जमीन पर फाइव स्टार होटल बनाने की तैयारी की चर्चा तेज हो गई है।
कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुंवाल ने इस पूरे मामले को बड़ा घोटाला बताते हुए मुख्य सचिव, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में शिकायत दर्ज कराई है। इंदौर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि कमर्शियल जमीन को कृषि भूमि बताकर रजिस्ट्री कराई गई, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए के स्टाम्प और पंजीयन शुल्क का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं, जिन खसरा नंबरों की जमीन पर सौदा हुआ, उनमें से कुछ हिस्से आज भी महाकाल मंदिर पार्किंग के रूप में इस्तेमाल हो रहे हैं।
चिंतामणि मालवीय, बीजेपी विधायक का कहना है कि जो दस्तावेजों में दर्ज था, उसी आधार पर रजिस्ट्री कराई गई है। पूरी प्रक्रिया कानूनी तरीके से हुई है। लगाए गए आरोप झूठे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है… जब सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के लिए महाकाल क्षेत्र की जमीनें सुरक्षित रखी जानी चाहिए थीं, तब आखिर बीजेपी के ही नेताओं पर सरकारी जमीन खरीदने के आरोप क्यों लग रहे हैं? और क्या इस विवाद का असर आने वाले सिंहस्थ महापर्व पर पड़ेगा?