Sagar- हनीट्रैप आरोपी रेशु चौधरी के मोबाइल से मिले 100 वीडियो, कई रसूखदारों की बढ़ी टेंशन
इंदौर में ही हनीट्रैप को लेकर एक बार सागर चर्चाओं में आ गया है क्यों की इसकी मास्टरमाइंड श्वेता जैन के साथ सागर की ही रेशु चौधरी का भी नाम जुड़ गया, पुलिस ने तीन दिन पहले गिरफ्तार किया था और इंदौर ले गई थी जहां पूछतांछ के बाद वापिस मकरोनिया लाया गया, उसके घर से मोबाइल और डिजीटल डिवाइस जब्त की गई, इस डिवाइस से 100 से ज्यादा आपत्तिजनक वीडियो मिले हैं। ये वीडियो नेता, अफसरों और बिजनेसमैन के हैं। वो इन वीडियो से ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपए वसूल चुकी है। जबकि कई अन्य सौदों पर भी काम चल रहा था। कुछ वीडियो बेचने की भी तैयारी चल रही थी।
दरअसल इंदौर एक बार फिर चर्चित हनी ट्रैप मामले के केंद्र में है, जिसने 2019 के हनी ट्रैप कांड की यादें ताजा कर दी हैं। हनी ट्रैप-2 की गूंज मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात के साथ ही दिल्ली के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों तक पहुंच गई है। मामले में गिरफ्तार श्वेता विजय जैन, रेशू चौधरी और अलका दीक्षित से पूछताछ में लगातार ऐसे खुलासे हो रहे हैं, जिनसे कई रसूखदारों की चिंता बढ़ गई है।
जांच में सामने आया कि रैकेट प्लांड तरीके से चलाया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, भोपाल से श्वेता विजय जैन पूरा नेटवर्क चलाती थी। श्वेता सीधे सामने आने के बजाय रेशू चौधरी को निर्देश और ट्रेनिंग देती थी। रेशू चौधरी अपने संपर्कों की जानकारी देती थी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति बनाई जाती थी।
सिंडिकेट का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ था। मध्य प्रदेश में जांच के दायरे में एक विधायक, मालवा-निमाड़ के कुछ नेता और एक पूर्व अधिकारी हैं। छत्तीसगढ़ के एक डीआईजी रैंक के अधिकारी का नाम भी है। दिल्ली के एक वरिष्ठ नेता और गुजरात के एक उद्योगपति भी इसके शिकार बताए जा रहे हैं। दिल्ली के एक नेता से 4 करोड़ रुपए वसूलने की साजिश भी जांच के दायरे में है। वीडियो को बड़े स्तर पर बेचने की तैयारी में थे
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी वीडियो को बड़े स्तर पर बेचने की तैयारी में थे। जांच एजेंसियों को राजनीतिक संपर्कों और संभावित आर्थिक सौदों के संकेत मिले हैं। जांच में ये भी संकेत मिले हैं कि एक विधायक से जुड़ा वीडियो राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से साझा किया गया था।