घर के इकलौते चिराग को मिली नई ज़िंदगी, डॉक्टरों ने मुफ्त किया इलाज,अब चलने लगा अपने पैरों पर
कहते हैं की डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है। इसी तरह डॉक्टरों ने एक परिवार के चिराग को बुझने से बचा लिया। न सिर्फ हजारों रूपये का इलाज फ्री में किया बल्कि खर्च भी खुद ही दे दिया। जिस वजह एक 6 साल के मासूम बच्चे को नया जीवन मिल उसका और वह अब अपने पैरों पर भी खड़ा हो सकता है। ये कहानी है एमपी के पन्ना जिले की, जहां जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने मानवता की मिसाल पेश की है। गंभीर जीबीएस नामक बीमारी से जूझ रहे आदर्श का डॉक्टरों ने मुफ्त इलाज कर नई ज़िंदगी दी। दरअसल आदर्श गरीब परिवार से है माता-पिता का इकलौता बेटा है। जो अचानक एक गंभीर बीमारी की चपेट में आ गया। धीरे-धीरे उसके शरीर में कमजोरी हुई फिर चलने-फिरने में भी परेशानी होने लगी। डॉक्टरों ने जाँच की तो पता चला की वह गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) नाम की दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में शरीर में पैरालिसिस जैसी स्थिति बनने लगती है। मरीज के हाथ-पैर कमजोर हो जाते हैं। आदर्श के माता-पिता उसे इलाज के लिए दिल्ली लेकर पहुंचे बड़े अस्पतालों में दिखाया लेकिन कुछ नहीं हुआ। इलाज का खर्च काफी ज्यादा था जिससे परिवार निराश हो गया। जब हताश माँ-बाप पन्ना जिला अस्पताल पहुंचे तो शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पी.के. गुप्ता ने बच्चे की हालत को गंभीरता से समझते हुए तुरंत इलाज शुरू कराया। डॉक्टरों के मुताबिक आदर्श के इलाज के लिए इम्यूनोग्लोबुलिन (IVIG) इंजेक्शन जरूरी थे। एक इंजेक्शन की कीमत करीब 15 हजार रुपए थी। पूरे इलाज में तकरीबन 75 हजार रुपए का खर्च आता। जो परिवार के लिए सम्भव नहीं था। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों ने मिलकर पूरा इलाज निशुल्क कराया। लगातार पांच दिन इलाज करते हुए फिजियोथेरेपी दी गयी। जिससे अब आदर्श खुद अपने पैरों पर चलने लगा है। डॉक्टरों ने मानवता का धर्म निभाते हुए बच्चे को नई ज़िंदगी दी।--