Sagar - बेजुबानों का दर्द समझते हैं ये युवा, चल पड़ता है कारवां, मूक पशुओं की करते हैं सेवा
कितने ही मशहूर गाने की ये चंद लाइनें जो दिल को छू जाती हैं। किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, किसी के वास्ते हो तेरे दिल में प्यार, जीना इसी का नाम है क्या खूबसूरत बात है। और अब आप अपनी स्क्रीन पर जो तस्वीरें देख रहे हैं ये बिलकुल वैसी ही हैं। ये सागर के वो युवा हैं। जो बेजुबानों की मदद करते हैं उनके बीच पहुंचकर बढ़िया भोजन कराते हैं। भीषण गर्मी में जहां जन जीवन अस्त व्यस्त है। वहां इन युवाओं की टीम का हौसला काबिल ए तारीफ है। बस चल पड़ते हैं बेजुबानों का दर्द जानने, उन्हें फल-फ्रूट खिलाने। दिल में इंसानियत, जज़्बा, जोश और जूनून लिए युवाओं की टोली विशेष रूप से शहर के नजदीक गढ़पहरा मंदिर के पास पहुंची। बंदरों के बीच उन्हें तरबूज, केले और खीरे खिलाये, पूरे निस्वार्थ भाव से ये मूक पशुओं की सेवा करते हैं। ये सिलसिला काफी सालों से चलता आ रहा है।
सागर के रविंद्र ठाकुर और उनकी टीम ने मिलकर वन्य जीवों को फल-फ्रूट्स खिलाकर एक सराहनीय कार्य किया। दरअसल भीषण गर्मी और जंगलों में भोजन की कमी के कारण वन्य जीवों को खाने-पीने की समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में लोगों द्वारा उनकी सहायता करना दया और मानवता का प्रतीक है। युवाओं की टीम जंगल क्षेत्र में पहुंची जहां बंदरों को तरबूज, केला, खीरा और अन्य फल खिलाये गए। तस्वीरें देखकर आप खुद ही अंदाज़ा लगा सकते हैं की कितना सुंदर ये पल होगा।
बता दें की सिर्फ गढ़पहरा ही नहीं बल्कि आसपास के और भी कई क्षेत्रों में इन युवाओं की टीम पहुँचती है। बंदरों समेत अन्य पशुओं के लिए भी इसी तरह से फल-फ्रूट खिलाये जाते हैं। और ये कारवां सुबह से ही शुरू हो जाता है। सभी इकट्ठा होते हैं। फल फ्रूट समेत अन्य जरूरत की चीजें ली जाती हैं इसके बाद उन्हें बांटने निकल पड़ते हैं। और पशुओं की सेवा कर सुखद एहसास की अनुभूति होती है। इस मौके पर कई अन्य युवाओं की भी मौजूदगी रही।------