Sagar-डेयरी बिजनेस की ‘ब्लैक गोल्ड’ बनी मुर्रा भैंस! 16 लीटर दूध से बदल रही किस्मत ! SAGAR TV NEWS
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने में जिस नस्ल का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है, वो है मुर्रा भैंस… और अब बुंदेलखंड में यही भैंस डेयरी बिजनेस की “ब्लैक गोल्ड” बन चुकी है।
सागर के गोकुल ग्राम पशु प्रजनन केंद्र में इन दिनों मुर्रा भैंसों को देखने के लिए पशुपालकों की भीड़ उमड़ रही है। वजह है इसकी शानदार दूध देने की क्षमता और हर मौसम में खुद को ढाल लेने की ताकत।
मुर्रा भैंस की पहचान उसके मुड़े हुए सींग, चमकदार काले रंग और भारी शरीर से होती है। एक वयस्क मुर्रा भैंस का वजन 550 से 650 किलो तक होता है। लेकिन इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका दूध उत्पादन। सामान्य देखभाल में ये रोज 15 से 20 लीटर दूध देती है, डेयरी कारोबार से जुड़े लोगों के लिए मुर्रा भैंस फायदे का सौदा इसलिए भी है क्योंकि इसके दूध में करीब 7 प्रतिशत फैट पाया जाता है। यही वजह है कि इससे बनने वाला घी, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद ज्यादा गुणवत्ता वाले माने जाते हैं और बाजार में अच्छी कीमत दिलाते हैं।
गोकुल ग्राम रतौना के प्रबंधक राकेश कुमार गौतम बताते हैं कि मुर्रा नस्ल मूल रूप से हरियाणा और पंजाब पाकस्तानी पंजाब क्षेत्र की है, लेकिन अब बुंदेलखंड में भी बड़ी संख्या में पशुपालक इसे अपना रहे हैं। एक मुर्रा भैंस की कीमत 80 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक होती है, लेकिन दूध उत्पादन और लंबी उम्र के कारण किसान इसे घाटे का नहीं बल्कि मुनाफे का सौदा मानते हैं।डेयरी सेक्टर में बढ़ती मांग के बीच मुर्रा भैंस आज किसानों और पशुपालकों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बनती जा रही है… और यही वजह है कि बुंदेलखंड में इसका जलवा लगातार बढ़ता जा रहा है।