कृषि मंडी की अव्यवस्थाओं पर भड़के कलेक्टर! किसानों से अवैध वसूली बंद करने और 5 रुपए में भरपेट भोजन के दिए निर्देश
कृषि उपज मंडी में किसानों को हो रही परेशानियों और फैली अव्यवस्थाओं को लेकर कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार दोपहर उन्होंने एमपी के दमोह जिले के सागर नाका स्थित कृषि उपज मंडी का औचक निरीक्षण किया, जहां कई गंभीर खामियां सामने आईं। अव्यवस्थाओं को देखकर कलेक्टर ने नाराजगी जताई और मंडी सचिव सहित संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने अनाज चोरी, अवैध वसूली, भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायतें कीं। इस पर कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना चाहिए और नीलामी से लेकर तौल तथा भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
कलेक्टर ने पाया कि मंडी में किसानों से प्रति बोरी 22 रुपए तक वसूले जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार यह शुल्क केवल साढ़े 9 रुपए होना चाहिए। इस पर उन्होंने तत्काल व्यवस्था सुधारने और नियमों के अनुसार ही शुल्क लेने के निर्देश दिए। इसके अलावा किसानों के लिए बड़ी राहत की घोषणा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि मंडी में आने वाले किसानों को मात्र 5 रुपए में भरपेट और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसान रात्रि विश्राम करना चाहें तो उनके लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि शासन द्वारा निशुल्क उपलब्ध शौचालय सुविधा के लिए किसानों से 10 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। कलेक्टर ने इसे गलत बताते हुए तत्काल बंद कराने और दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। किसानों द्वारा अनाज चोरी की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मंडी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त रखने और निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने पेयजल व्यवस्था का जायजा लिया, कैंटीन में जाकर भोजन की गुणवत्ता जांची और किसानों के साथ बैठकर समोसे भी खाए। किसान संघ, व्यापारी संघ और हम्माल संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्होंने साफ कर दिया कि अब मंडी में नियमों के अनुसार ही काम होगा और गड़बड़ी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।