खेतों में भीग रही तैयार मूंग की फसल, बढ़ा नुकसान का खतरा, प्री-मानसून बना किसानों की परेशानी !
प्री-मानसून की दस्तक किसानों के लिए मुसीबत बनती नजर आ रही है। पिछले एक सप्ताह से हो रही रुक-रुक कर बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में तैयार खड़ी मूंग की फसल को संकट में डाल दिया है। कटाई के लिए तैयार फसल अब खेतों में ही भीग रही है, जिससे किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। मौसम की बेरुखी के चलते किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा मंडरा रहा है।
एमपी के नर्मदापुरम जिले के सिवनीमालवा तहसील के कई गांवों में इन दिनों किसान मौसम की मार झेल रहे हैं। खेतों में मूंग की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी है, लेकिन लगातार बदलते मौसम के कारण कटाई का काम प्रभावित हो रहा है। किसान हर सुबह उम्मीद के साथ खेतों की ओर निकलते हैं, लेकिन दोपहर या शाम तक बारिश शुरू होते ही उनकी उम्मीदों पर पानी फिर जाता है।
ग्राम रेहड़ा के किसान सुनील पटेल बताते हैं कि वे रोजाना हार्वेस्टर लेकर खेतों में पहुंचते हैं और कटाई शुरू भी कर देते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद बारिश आ जाने से काम रोकना पड़ता है। बार-बार कटाई रुकने से फसल लंबे समय तक खेतों में पड़ी हुई है। इससे दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने और उत्पादन में कमी आने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों का कहना है कि यदि मौसम जल्द साफ नहीं हुआ तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। बारिश के साथ-साथ किसानों को एक और बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। खेतों तक पहुंचने वाले अधिकांश रास्ते कच्चे हैं, जो हल्की बारिश में ही कीचड़ से भर जाते हैं। ऐसे में हार्वेस्टर और कृषि मशीनें खेतों तक पहुंचने में दिक्कत महसूस कर रही हैं। कई बार वाहन कीचड़ में फंस जाते हैं, जिन्हें निकालने में अतिरिक्त समय और पैसा खर्च करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि मौसम की इस मार ने खेती की लागत बढ़ा दी है और मुनाफा कम होने का खतरा पैदा कर दिया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित फसलों का तत्काल सर्वे कराया जाए, नुकसान का आकलन कर राहत राशि दी जाए और ग्रामीण क्षेत्रों के संपर्क मार्गों को पक्का बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। सिवनीमालवा क्षेत्र में बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर तैयार फसल खेतों में खराब होने का खतरा झेल रही है, तो दूसरी ओर खराब रास्ते खेती को और मुश्किल बना रहे हैं। अब किसानों की निगाहें मौसम के साफ होने और प्रशासन से मिलने वाली राहत पर टिकी हुई हैं। अगर जल्द हालात नहीं सुधरे, तो किसानों को बड़ा आर्थिक झटका लग सकता है।