ब्लास्टिंग से दहले आदिवासी, हथियारों के दम पर धमकाने के आरोप, खनन माफिया का आतंक ! | SAGAR TV NEWS |
मध्य प्रदेश में आदिवासी हितों और उनके अधिकारों की रक्षा के दावे किए जाते हैं, लेकिन मऊगंज जिले से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां सरदमन गांव के दर्जनों आदिवासी परिवार खनन गतिविधियों से परेशान होकर अपने घर, जमीन और जीवन की सुरक्षा की गुहार लगाने कलेक्ट्रेट पहुंच गए। ग्रामीणों का आरोप है कि खनन माफिया के आतंक और प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनका जीवन संकट में पड़ गया है। एमपी के मऊगंज के सरदमन गांव से आए दो दर्जन से अधिक आदिवासी परिवारों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से न्याय की मांग की। बुजुर्ग महिलाओं से लेकर छोटे बच्चों तक ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा कि खनन और ब्लास्टिंग की वजह से उनके मकानों में दरारें आ रही हैं और कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं।
इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कुछ लोग हथियारों के साथ दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने गांव के आसपास हथियार लेकर घूमने और खनन गतिविधियों का विरोध किया, तो उन्हें डराया-धमकाया गया। वायरल वीडियो के बाद गांव में भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सीधी जिले के हरदी क्षेत्र में संचालित एक स्टोन क्रशर को पत्थर सप्लाई करने के लिए गांव के आसपास लगातार खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर बस्ती के नजदीक ब्लास्टिंग की जा रही है। ब्लास्टिंग के दौरान उड़ने वाले पत्थर घरों तक पहुंच जाते हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा बना रहता है। कई परिवारों ने दावा किया कि बच्चे और महिलाएं दिनभर डर के साये में रहने को मजबूर हैं।
पीड़ितों का कहना है कि वे कई बार प्रशासन और खनिज विभाग से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि धूल और प्रदूषण के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि कुछ परिवार पलायन करने पर विचार कर रहे हैं। मऊगंज का यह मामला केवल खनन विवाद नहीं, बल्कि आदिवासी परिवारों के अस्तित्व और सुरक्षा से जुड़ा सवाल बन गया है। ग्रामीण प्रशासन से अवैध खनन पर रोक, सुरक्षा की गारंटी और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि शिकायतों और वायरल वीडियो के बाद प्रशासन क्या कार्रवाई करता है और प्रभावित परिवारों को कब राहत मिलती है।