खैर की लकड़ी की तस्करी करते वन विभाग ने पकड़ी बोलेरो, रैकी कर रहे बाइक सवार भी गिरफ्तार
वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए खैर की कीमती लकड़ी से भरे वाहन को पकड़ा है। वन परिक्षेत्र पेटलावद की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर घेराबंदी कर तस्करी में इस्तेमाल हो रहे तीन वाहनों को जब्त किया और दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सक्रिय वन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जानकारी के मुताबिक एमपी के झाबुआ जिले में वन विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि क्षेत्र में खैर की लकड़ी का अवैध परिवहन किया जा रहा है। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम सक्रिय हुई और संभावित मार्गों पर घेराबंदी कर निगरानी शुरू कर दी। कुछ ही देर बाद टीम को एक संदिग्ध बोलेरो पिकअप दिखाई दी, जिसे रोककर तलाशी ली गई।
जांच के दौरान बोलेरो पिकअप क्रमांक MP43 ZJ 5397 में बड़ी मात्रा में खैर की लकड़ी भरी मिली। वन अधिकारियों ने तत्काल वाहन को कब्जे में ले लिया। इसी दौरान यह भी पता चला कि तस्करी को सुरक्षित अंजाम देने के लिए दो बाइक सवार आगे-पीछे चलकर रैकी और पायलटिंग का काम कर रहे थे। वन विभाग की टीम ने उन्हें भी मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पप्पू पिता तेरु मुनिया निवासी रतनाली तहसील थांदला और कालूसिंह पिता हरचंद डिंडोर निवासी संगेसरा कुंदनपुर बाजना के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। वन विभाग यह जानने का प्रयास कर रहा है कि लकड़ी कहां से काटी गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था।
वन विभाग ने बोलेरो पिकअप सहित तस्करी में इस्तेमाल किए गए तीनों वाहनों को जब्त कर वन परिक्षेत्र कार्यालय पेटलावद में खड़ा कराया है। जब्त खैर की लकड़ी और वाहनों के खिलाफ वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। वन विभाग की इस कार्रवाई को अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं और कितने समय से यह अवैध कारोबार संचालित किया जा रहा था। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।