मुनि सुधासागर जी पर टिप्पणी के विरोध में सड़कों पर उतरे हजारों लोग, जैन समाज का आक्रोश फूटा!
जैन मुनि सुधासागर जी महाराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर जैन समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। सोमवार को बड़ी संख्या में समाजजन सड़कों पर उतरे और शहर में विशाल बाइक रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया। एमपी के अशोकनगर में रैली के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई। जैन समाज का कहना है कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले तत्वों पर तत्काल कठोर कार्रवाई होना चाहिए।
जैन समाज द्वारा आयोजित यह रैली सुभाषगंज स्थित जैन मंदिर से शुरू हुई। समाज के लोग हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। रैली में बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और समाज के पदाधिकारी शामिल हुए। पूरे मार्ग में जैन समाज के समर्थन में नारे लगाए गए और धार्मिक एकता का संदेश दिया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि मध्यप्रदेश दिगंबर जैन समाज का प्रमुख केंद्र रहा है और यह क्षेत्र जैन संतों की साधना स्थली के रूप में भी जाना जाता है। ऐसे में सोशल मीडिया के माध्यम से जैन संतों के खिलाफ कथित दुष्प्रचार और आपत्तिजनक टिप्पणियां समाज की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचा रही हैं। उनका आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्व सुनियोजित तरीके से फर्जी पहचान बनाकर धार्मिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार इस मामले में अशोकनगर जैन समाज के अध्यक्ष राकेश कासल ने 3 जून को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। समाज का कहना है कि केवल एफआईआर दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। जैन समाज ने विशेष रूप से जैन संतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। समाज के लोगों का कहना है कि संत पद विहार करते हैं और उनके साथ स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि या दुष्प्रचार से उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ज्ञापन के माध्यम से रीवा, सागर और अशोकनगर से जुड़े पूरे मामले की व्यापक जांच की मांग की गई। जैन समाज ने प्रशासन से मांग की है कि सोशल मीडिया पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में क्या कदम उठाता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।