आठ साल पहले डैम में हमारा सब कुछ डूब गया,उचित मुआवजा नहीं मिला,कोई सुनने वाला भी नहीं !
किसान आठ साल से भटक रहे हैं प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। लगातार अधिकारीयों तक बात पहुंचाई जा रही है लेकिन बांध सिंचाई परियोजना के कारण विस्थापित और प्रभावित हुए किसानों को आज तक न तो उचित मुआवजा मिला है न ही विस्थापन की राशि, जिसको लेकर किसानों ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है जिनके समर्थन में अब कांग्रेस भी उतर आई है। यह पूरा मामला पन्ना जिले का है। इस तरह के आरोप किसानों ने लगाए।
बताया जा रहा है की पन्ना में तेंदूघाट बांध सिंचाई परियोजना (पवई) के कारण विस्थापित और प्रभावित हुए शाहनगर तहसील के करीब चार गांव के लोग आठ साल से परेशान हैं। जिनमें मझगवां, सतधारा, सारंगपुर और देवरा गांव के किसान शामिल हैं। जिसको लेकर शाहनगर तहसील कार्यालय के सामने किसानों के समर्थन में कांग्रेस पार्टी का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है दूसरे दिन भी भीषण गर्मी के बावजूद धरना जारी रहा। कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष ने कहा की जब तक किसानों की जायज मांगें पूरी नहीं की जातीं और उन्हें एकमुश्त मुआवजा नहीं मिल जाता। तब तक यह आंदोलन और धरना समाप्त नहीं होगा। मामले के तूल पकड़ने पर स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। लेकिन एसडीएम और तहसीलदार कैमरे के सामने नहीं आये। शाहनगर तहसीलदार कोमल सिंह ने फोन पर बताया कि भू-अर्जन से जुड़ी फाइल को दो महीने पहले ही जिला मुख्यालय पन्ना भेजा जा चुका है किसानों को जल्द ही मुआवजे का भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं SDM से बात करने पर उन्होंने कहा की आठ साल पहले जब भूमि अधिग्रहण हुआ था वो यहां तैनात नहीं थे। अभी आये हैं। मामले में आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। किसानों के मुताबिक उनकी मुख्य मांगों में तेंदूघाट बांध सिंचाई परियोजना से डूब क्षेत्र में आई जमीनों और मकानों का एक मुश्त मुआवजा शीघ्र दिया जाए। प्रभावित जमीनों का वर्तमान गाइडलाइन के अनुसार चार गुना मुआवजा तय हो। साल 2018 से डूब में आई जमीनों का मुआवजा और फसल क्षति-पूर्ति का तत्काल भुगतान किया जाने की मांग शामिल है। किसानों का कहना है की अधिग्रहण के बाद से ही सारे किसान परेशान हैं। कोई सुनने वाला नहीं है तेन्दुघाट डैम में हमारा सब कुछ डूब गया।-