बिना पैसे नहीं होता इलाज, परिजनों ने खोली व्यवस्थाओं की पोल, जिला अस्पताल के डिलेवरी वार्ड पर गंभीर आरोप!
एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार डिलेवरी वार्ड में इलाज को लेकर मरीजों और उनके परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिना पैसे दिए समय पर इलाज नहीं किया जाता, जबकि शिकायत करने पर अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ता है। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक महिला के गर्भ में मृत शिशु होने के बावजूद परिवार को कई दिनों तक अस्पताल के चक्कर लगाने पड़े। मध्यप्रदेश के सागर संभाग के छतरपुर जिला अस्पताल के डिलेवरी वार्ड में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं और रकम नहीं देने पर मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिलता।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में कई बार कलेक्टर, एसडीएम और सीएमएचओ तक शिकायत पहुंचाई गई, लेकिन हालात में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। मरीजों का कहना है कि सामान्य प्रसव के मामलों में भी ऑपरेशन कराने का दबाव बनाया जाता है। साथ ही इलाज के दौरान बाहर से महंगी दवाएं लिखी जाती हैं, जिन्हें बाद में वापस कर कमीशन लेने जैसी बातें भी सामने आती रही हैं। सबसे चिंताजनक मामला राजनगर क्षेत्र की एक महिला का बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार, महिला के गर्भ में करीब दो माह के शिशु की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद परिवार पिछले एक सप्ताह से इलाज के लिए अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। महिला तीन दिनों से डिलेवरी वार्ड में भर्ती है, लेकिन समय पर उपचार नहीं मिलने से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।
परिवार का आरोप है कि स्टाफ द्वारा पैसे की मांग की गई और राशि नहीं देने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। वहीं अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों ने भी इलाज में लापरवाही और अवैध वसूली जैसे आरोप लगाए हैं। जब इस मामले में सिविल सर्जन से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि शिकायत की जानकारी लेकर पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि मरीज के इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उठे इन गंभीर आरोपों ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है और जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।