दुनिया में आते ही माँ चल बसी, फिर छिना पिता का साया, अब रेल दौड़ाएगी ये बहादुर बेटी | SAGAR TV NEWS |
मशहूर शायर राहत इंदौरी की कुछ लाइनें हैं। तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो, मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो। कुछ इसी तरह एक बेटी ने भी अपनों सपनो को पंख लगाए हैं। मकान भले ही कच्चा था लेकिन हौसले पक्के थे। गरीब बेटी ने ऐसा काम किया की अब उसकी सराहना की जा रही है जल्द ही ये बेटी अब रेल दौड़ाती हुई नज़र आएगी। भावुक कर देने वाली ये तस्वीरें एमपी के रीवा जिले के एक छोटे से गांव की हैं। जहां की रहने वाली कल्पना प्रजापति असिस्टेंट लोको पायलट बनी हैं।
बहुरीबांध की रहने वाली कल्पना की कहानी बेहद भावुक और मार्मिक है। उसने ये मुकाम बिना माँ-बाप के पाया है। दरअसल जब वह इस दुनिया में आई तो माँ चल बसी। उसका सहारा पिता बने हर कदम हर जगह उन्होंने दोनों फ़र्ज़ निभाए। उसने रीवा आईटीआई से साल 2021-23 के बैच में अपनी पढ़ाई पूरी की। लेकिन साल 2024 आया और फिर एक बार उसे गहरा ज़ख्म दे गया। दर्दनाक हादसे में करंट लगने के उसके पिता भी उसे छोड़ गए। अच्छा ख़ासा इंसान ऐसे में टूट जाए लेकिन कल्पना हार मानने वालों में से नहीं थी। इस दौरान आईटीआई के ट्रेनिंग ऑफिसर नरेंद्र द्विवेदी ने एक सच्चे गुरु का फ़र्ज़ निभाया। उन्होंने उसे मार्गदर्शन दिया। परिवार के अन्य लोगों ने भी साथ नहीं छोड़ा।
बस फिर क्या था कल्पना प्रजापति अपने लक्ष्य को पूरा करने में ही जुटी हुई थी। चुनौतियों से लड़ती रही। और आखिरकार मार्च 2026 में वो दिन आया जब कल्पना का चयन भारतीय रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर हो गया। इस सफलता पर कल्पना कहती हैं की शुरुआत से ही मुश्किलें बहुत थीं। लेकिन गुरु नरेंद्र सर और पूरे परिवार ने कभी अकेले नहीं पड़ने दिया।
कल्पना प्रजापति आज उन लोगों के लिए एक बड़ी मिसाल है जो चुनैतियों से घबरा जाते हैं। जो जल्दी हार मान लेते हैं। अगर कुछ कर गुजरने का जज़्बा हो तो फिर हर मुश्किल आसान होती है। इस बेटी पर आपको भी गर्व महसूस होगा।