अतिक्रमण हटाने पहुंचे अधिकारी लौटे खाली हाथ, ग्रामीणों में आक्रोश, सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप!
सरकारी जमीन पर कथित कब्जे का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि गरीबों के आवास के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ एक कर्मचारी ने अवैध कब्जा कर रखा है। जब प्रशासन अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तो कार्रवाई किए बिना ही अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा। इसके बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। मामला उज्जैन जिले की घटिया तहसील के ग्राम पंचायत रलायता भोजा का है। यहां शासन द्वारा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए आवास निर्माण के उद्देश्य से भूमि चिन्हित की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि इस सरकारी जमीन पर लंबे समय से अवैध कब्जा किया गया है।
बताया जा रहा है कि जब ग्राम पंचायत ने गरीबों के लिए प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया शुरू करते हुए भूमि की नाप-जोख करानी चाही, तब कथित अतिक्रमणकर्ता ने विरोध किया और सरपंच तथा सचिव को मौके से भगा दिया। इसके बाद ग्राम पंचायत के सरपंच भगवान सिंह चौधरी ने पूरे मामले की शिकायत एसडीएम कार्यालय में दर्ज कराई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए घटिया एसडीएम ने 11 जून को तहसीलदार और जनपद पंचायत की संयुक्त टीम को मौके से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।
निर्धारित समय पर अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे, लेकिन पर्याप्त पुलिस बल की व्यवस्था नहीं होने और संबंधित राजस्व अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण कार्रवाई शुरू ही नहीं हो सकी। नतीजा यह रहा कि पूरी टीम बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट गई। ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमणकर्ता अपने आपको कलेक्टर कार्यालय का कर्मचारी बताकर प्रशासन पर दबाव बनाता है और रसूख के दम पर सरकारी जमीन खाली करने से इनकार कर रहा है।
इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया तो गरीब परिवारों को उनके आवास का अधिकार नहीं मिल पाएगा। सरकारी जमीन पर कब्जे और कार्रवाई के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटने का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रहा है। अब ग्रामीण निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि गरीबों को उनका हक मिल सके और सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जा सके।